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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

डा श्याम गुप्त के पद........हे माँ ! तेरे दर हम आये.....

                             ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...






हे माँ ! तेरे दर हम आये |

जनम जनम के पाप पुरातन, माँ के दर्श नसाए |

लाल चुनरिया ओढ़ के माता, तेरा रूप सुहाए |

जब जब बढी असुरता जग में माँ तू उसे मिटाए |

अनति अनीति अधर्म असुरता खप्पर रखे जलाए |

अधम अधर्मी अत्याचारी, असि की धार समाये |

आदि-शक्ति लीला पद बंदे, श्याम्’ सहज सुख पाए || 
 

बुधवार, 24 सितंबर 2014

श्याम स्मृति- दुर्गा देवी रहस्य ...डा श्याम गुप्त....

                     ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



श्याम स्मृति- दुर्गा देवी रहस्य ...
महादेवी की वन्दना करते हुए त्रिदेव----ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं ऋषि गण...
  
                           महादेवी दुर्गा  को तीन महा-शक्तियों --महाकाली, शक्ति की देवी...महालक्ष्मी ,धन-संमृद्धि की देवी तथा महासरस्वती, विद्या ज्ञान की देवी ....का  सम्मिलित अवतार कहा जाता है  |

          महादेवी दुर्गा समस्त दानवों, असुरों दुष्टों दुष्टता के विनाश का कारण बनती हैं...|  
      इस तथ्य का तात्विक अर्थ है कि जब जब समाज में फैले अनाचार, असुरता आदि के विनाश की आवश्यकता होती है तो वे सभी व्यक्ति विद्वान् जिनके पास धन बल है...शक्ति है एवं वुद्धि ज्ञान का बल है सभी को  समाज से बुराई को दूर करने हेतु संगठित होकर कार्य करना चाहिए |
          भगवान राम ने रावण पर विजय से पूर्व इसी महाशक्ति की आराधना की थी | इसका तत्वार्थ है कि सर्व-शक्तिमान भी जब तक प्रकृति -शक्ति से नहीं जुड़ते ..विजयश्री उन्हें प्राप्त नहीं होती |
 

बुधवार, 17 सितंबर 2014

कुछ मुक्तक छंद ......डा श्याम गुप्त

                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...




तेरे नयनों से मित्र आज कुछ ऐसी खुशी छलके,
नयन-कलशों से प्रभु की भक्ति-आनंद धार ज्यों छलके |
तेरे आनन पै आनंद की लहर से श्याम आनंदित –
कृपा हो प्रभु की जीवन भर ये आनंद रस रहे छलके ||


अगर प्रलय से बचना चाहें
तो प्रकृति का आश्रय धारें |
कृत्रिमता छोड़ें जीवन में,
प्रकृति को भी यथा सुधारें |



घोर हलाहल कंठ अवस्थित, ताहू पे भोला रह्यो भूल्यो
प्रकृति माता अरु आदि-शक्ति तब  क्रुद्ध हुई धीरज टूट्यो|
जलधार बनी तब आई प्रलय,इक छोर जटा को जब छूट्यो |
छोटे बड़े या बोध-अबोध, भयो पूरौ पाप घडा फूट्यो |


स्वयं को भी नहीं बक्सता वह न्याय के पथ पर |
चलता रहा मानव ये क्यों अन्याय के पथ पर|
उसने भला कब मान रख्खा प्रकृति-ईश्वर का,
अब प्रश्न उठाता ईश के कर्तव्य के पथ पर |

 

शनिवार, 13 सितंबर 2014

नयी शिक्षा नीति ....डा श्याम गुप्त ...

                           ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



                            नयी शिक्षा नीति

              शिक्षक दिवस पर शिक्षामंत्री स्मृति ईरानी द्वारा नयी शिक्षा नीति लागू करने की घोषणा स्वागत योग्य कदम है | परन्तु सरकार को ध्यान रखना होगा कि पिछले १०-१५ वर्षों से जो पश्चिमी अन्धानुकरण के हामी राजनीतिज्ञों व तथाकथित शैक्षिक विद्वानों द्वारा देश में प्रचालित, संचालित व प्रचारित “ रोज़गार परक शिक्षा “ ...जो विशेषज्ञ, प्रोफेशनल संस्थाओं का कार्य है, स्कूलों, कालेजों, विश्व-विद्यालयों का नहीं ....की अपेक्षा वास्तविक शिक्षा को लाना होगा | साथ ही बच्चों व छात्रों के लिए तात्कालिक लुभावनी व लाभकारी लगने वाली पाश्चात्य-परक योजनाओं को बंद करना होगा ... यथा छात्रों को परीक्षाओं में श्रेणियां देकर अगली कक्षा में प्रवेश दे देना, अनुत्तीर्ण करने की अपेक्षा | स्कूल व विद्यालय वास्तविक अर्थ में विद्या, शिक्षा प्रदान करें जो बच्चों व छात्रों को मानवता, मानव-आचरण, सदाचार, सत्यनिष्ठा, धर्म-चिंतन, समाज-संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता, भारतीयता, देशभक्ति आदि गुण प्रदान करें नकि सिर्फ कुशल कारीगर व विशेषज्ञ परन्तु भ्रष्ट व बेईमान व्यक्ति बनाएं |