
---हिन्दी वालों के लिए खुशखबरी , एक वैज्ञानिक खोज के अनुसार हिन्दी वालों का मष्तिस्क अधिक सक्रीय रहता है।
<-----पढ़ें एक समाचार ।
---यद्यपि यह इसलिए भी होसकता है कि अपनी मातृभाषा में व्यक्ति प्राकृतिक भाव से अधिक सहज, संवेदनशील, व क्रियाशील -विचार शील -मननशील होता है , और यह सभी जननी भाषाओं के लिए सत्य होता होगा |