विज्ञान कथा, कल्पना और विज्ञान के तथ्यों का मिश्रण है एवं नूतन परिकल्पनाओं की भावभूमि पर बुनी जाती है जो मानव समाज अथवा व्यक्ति विशेष पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रत्याशित प्रभावों के प्रति बुद्धिजीवियों और रचनाकारों के मन में उभरने वाली मानवीय एवँ साहित्यिक प्रतिक्रिया है। पौराणिक तथ्योँ व कथ्योँ से युत वैज्ञानिक कल्पनाओँ से सुसज्जित पौराणिक कथायेँ उन्हेँ और स्पष्ट भावभूमि प्रदान करती हैँ।
योरपीय साहित्य में पहली विज्ञान कथा फ्लाइंग मशीन(कलाकृति-1488-चित्रकार लियोनार्दो द विन्सी) एच.जी.वेल्स चर्चित उपन्यास-द टाइम मशीन(1895) द इनविजिबल मैन, द वार ऑफ द वर्ल्डस, द फर्स्ट मैन इन द मून आदि थीँ ।
बंगला में विज्ञान गल्प का उन्मेष इससे पूर्व हो चुका था। पौधों में जीवन के विश्लेषक और बेतार के आविष्कारक आचार्य जगदीश चंद्र बोस ने ‘तूफान पर विजय’ शीर्षक से प्रथम बांग्ला विज्ञान गल्प 1897 में ही लिखा था। इससे पूर्व भारतीय कथायेँ पंचतंत्र आदि में ये कथायेँ पर्याप्त पुरातन काल से कही सुनी जाती रही हैँ ।
पौराणिक कथाओँ का मूल श्रोत शताब्दियोँ पुरानी अपितु मानव व समाज की उत्पत्ति के साथ ही उद्भूत भारतीय शास्त्र परम्परा रही है। पुरा भारतीय ॠषि मुनियोँ के वैज्ञानिक आविष्कारोँ के कथा रूप वर्णन पुराणोँ में प्राप्त होते हैँ ।
हिन्दी विज्ञान कथा की पहली मौलिक कथा, आश्चर्यजनक घंटी, , सन 1908 लेखक-सत्यदेव परिव्राजक (ध्वनि अनुनाद पर आधारित)द्वारा रची गयी। वैज्ञानिक आविष्कारोँ व घटनाओँ से ओत प्रोत ऐयारी और तिलस्मी उपन्यासों के जनक देवकी नंदन खत्री चंद्रकांता (1892) के साथ हिंदी में प्रकट हुए। अन्य वैज्ञानिक व पौराणिक तथ्योँ युत रचनाओँ में प्रारम्भिक काल में दुर्गा प्रसाद खत्री- सुवर्ण रेखा, स्वर्गपुरी, सागर सम्राट और साकेत (उपन्यास), राहुल सांकृत्यायन- बाइसवीं सदी, डॉ.ब्रजमोहन गुप्त की दीवार कब गिरेगी, अस्थिपंजर, शैलगाथा, डॉ.सम्पूर्णानंद कृत पृथ्वी के सप्तर्षि मण्डल, डॉ.नवल बिहारी मिश्र के अधूरा आविष्कार, सत्य और मिथ्या प्रचलित हुए ।
मध्य काल में डॉ.ओमप्रकाश शर्मा रचित, महामानव की मंगल यात्रा, जीवन और मानव, पुराण एवं युगमानव, आचार्य चतुरसेन शास्त्री की खग्रास, रमेश वर्मा की सिंदूरी ग्रह की यात्रा, अंतरिक्ष स्पर्श । आधुनिक काल में देवेन्द्र मेवाड़ी (भविष्य, कोख), डॉ.अरविंद मिश्र की एक और क्रौंच वध, कुंभ के मेले में मंगलवासी, राजीव रंजन उपाध्याय - आधुनिक ययाति, सूर्य ग्रहण, हरीश गोयल - तीसरी आँख, ऑपरेशन पुनर्जन्म, मनीष मोहन गोरे - 325 साल का आदमी, कल्पना कुलश्रेष्ठ- उस सदी की बात ।
अपने प्राचीन ज्ञान स्थित विज्ञान व प्राचीन ग्रंथों और धर्मग्रथों में वर्णित उनकी उर्वर कल्पनाओं को तार्किकता के तराजू पर तौलकर प्रस्तुत विज्ञान पौराणिक कथायेँ समाज में वैज्ञानिक प्रवृत्ति के विकास में सहायक होँगी, अंधविश्वासों को दूर वअनुसंधान को भी नई दिशा प्रदान करेँगी । बच्चोँ के लिये लिखी गयीँ कम जटिल विज्ञान, फंतासी, कल्पनाओँ व पौराणिक तथ्योँ से ओत प्रोत कथायेँ अपने भविष्य दर्शन की विशेषता के साथ साथ साहित्यिक कहानियों से अलग तेवर और कलेवर प्रस्तुति से जनसामान्य हेतु विज्ञान का सामान्यीकरण प्रस्तुति व वैज्ञानिक प्रगति मॆं सहयोग प्रदान करेँगी।
विज्ञान के श्याम पक्ष, सुपर टेक्नोलॉजी के दूसरे चेहरे को, जनसामान्य को भावी विज्ञान के आसन्न खतरों से आगाह करने में, नए-नए रूपों में महामारियों का पुनरागमन, कूड़ाघर बनता जा रहा अंतरिक्ष, ध्रुवों की पिघलती बर्फ, बढ़ता ग्रीन हाउस प्रभाव आदि पर ये वैज्ञानिक व पौराणिक तथ्योँ से युक्त ये कथायेँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रभावों व संभावित परिवर्तनों को लेकर उपजी मानवीय प्रतिक्रिया को कथात्मक अभिव्यक्ति देकर अन्य साहित्यिक विधाओँ आलेख,सामान्यजन के लिए कथारूप, काव्य रचनाएँ, पुस्तकें आदि के नवीन प्रतुतीकरण मैँ सहायक होँगी। इसी आशा व विश्वास के साथ यह कृति पौराणिक व विज्ञान कथायेँ प्रस्तुत की जारही है ।
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