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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 4 दिसंबर 2011

खुदरा बाजार में ऍफ़ डी आई ....डा श्याम गुप्त

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ..
              खुदरा बाजार में ऍफ़ डी आई  पर विरोध  पर मोंटेक सिंह अहलूवालिया  का कथन है कि.... ...मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला में कई खामियां हैं ,किसानों को उपज का उचित दाम नहीं मिलता....आपूर्ति-तंत्र में अक्षमता , बिचौलिआपन तथा बरबादी है ...कोल्ड स्टोरेज बगैरह की व्यवस्था नहीं है.....आदि आदि....
            यदि एसा है तो यह तो आपकी सरकार की ही अक्षमता है | उसे ठीक करने के उपाय की बजाय आप विदेशियों को अपने घर में घुसा लेंगे क्या |   फिर तो राजनीति में , नेताओं के चरित्र में , मंत्रियों  के कार्यों में जाने कितनी खामियां हैं ...फिर क्यों हम भारतीय लोगों, नेताओं को ही सत्ता पर काविज़ करें , क्यों न विदेशियों को ही चुनाव में खड़ा होने का न्योता दें, क्यों न उन्हें ही नेता, मंत्री, मुख्य-मंत्री, राष्ट्रपति बनने का न्योता व मौक़ा दें ताकि देश की ये सारी समस्याओं का सरल , बिना कष्ट किये , बिना कठिनाई के हल होजाय |
           आप सब लोगों का क्या ख्याल है.....

7 टिप्‍पणियां:

G.N.SHAW ने कहा…

सर यह भी एक उचित उपाय है ! अगर ऐसा हुआ तो इसमे भी कालाबाजारी हो जाएगी !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

घर मज़बूत कर प्रतियोगिता उचित रहेगी।

S.N SHUKLA ने कहा…

सामयिक , सारगर्भित प्रस्तुति, आभार.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

कुतर्कों के पैर नहीं होते और न ही होते हैं केश ...
आपने न केवल मॉन्टेकी कुतर्क की पगड़ी उछालकर बताया कि यह गंजा है बल्कि तयम्बत हटाकर भी दिखाया कि यह पंगु भी है.
साधुवाद.

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद शा, व शुक्ला जी...
--धन्यवाद पान्डेजी-अब एक प्रतियोगिता हो ही जाय...अच्छा ख्याल है..
--धन्यवाद प्रतुल जी..सही कहा है कुतर्कों के न सिर होता है न पैर....आभार...

veerubhai ने कहा…

डॉ साहब निचोड़ के मारा है कोड़ा इस योजना खार को आपने .

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद वीरू भाई जी.....
---जैसा कि शा ने कहा ..यह एक आसान तरीका है विदेशों में भी कालाबाज़ारी फ़ैलाने का....भ्रन्गी कीट की तरह....वैसे भी हमारे एक मन्त्री कह चुके हैं कि हमें अमेरिका देदो हम बिहार बना देंगे...