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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शनिवार, 12 जनवरी 2013

कैसा आदर्श..कैसी आदर्श पत्रकारिता....डा श्याम गुप्त

                                           ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...







                           एक बहु प्रचारित  व प्रतिष्ठित समाचार पत्र...राजस्थान पत्रिका का यह हाल है कि उसके मुख्य सम्पादक दार्शनिक श्री गुलाब कोठारी जी एक तरफ तो ..आदर्श पत्रकारिता की बातें कहते नहीं अघाते ...उनकी कवितायें..आलेख..कृतित्व भी सदाचरण की बातें कहते नहीं थकते .....






 ----वहीं दूसरी ओर उसी राजथान पत्रिका में ---जेनुइन डेटिंग ....जेनुइन मीटिंग .... महिला-पुरुष मिलन के समाचार ( विज्ञापन ) प्रकाशित होते हैं ....














----- क्या ये अखबार वाले डेटिंग को, आपस में अनजाने स्त्री-पुरुष की मीटिंग को जेनुइन अर्थात उचित मानते हैं
...... यह कैसी भारतीय संस्कृति वाला समाचार पत्र है....
----- यह कैसी आदर्श पत्रकारिता है..... क्या पर उपदेश कुशल बहुतेरे ...को चरितार्थ नहीं कर रही ....
----- क्या यह कथनी व् करनी का अंतर नहीं है ...
------ क्या यह धन व व्यापार के हेतु .....अपना आचरण -विक्रय नहीं है.....
---- यदि एक आदर्श सम्पादक की आदर्श पत्रिका का यह हाल है तो हम मीडिया से क्या अपेक्षाएं रख  सकते हैं .........

4 टिप्‍पणियां:

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

बे -लगाम हैं आज जन संचार के माध्यम .निगम हैं ये .ग्लेमर को और अपराध दोनों को समान रूप से ग्लेमराइज करते हैं ये लोग . जिस भी चीज़ में लाभ दिखता है उसी को ये आकर्षक और लुभावना

बना देते हैं .फिर नीम हकीमों के विज्ञापन हों या अवैध प्रेम मिलन के .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

धन भी तो कमाना है, कहाँ से करें..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (13-12-2013) को (मोटे अनाज हमेशा अच्छे) चर्चा मंच-1123 पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद ..शर्माजी, शास्त्रीजी एवं पांडे जी....