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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

सृजन संस्था व अगीत परिषद् के तत्वावधान में .. अगीतोत्सव-१५ ..चित्रमय रिपोर्ट .डा श्याम गुप्त


                                       ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ..   

                           सृजन संस्था एवं अगीत परिषद् केतत्वावधान में लखनऊ में राजाजी पुरम के मेथमेटीकल  स्टडी सर्कल में अगीतोत्सव -१५ का आयजन हुआ | इस अवसर पर पूर्व न्यायाधीश , साहित्यकार एवं साहित्यकार कल्याण परिषद् पत्रिका के सम्पादक श्री राम चन्द्र शुक्ल का जन्म दिवस मनाया गयाएवं उनका सम्मान किया गया | वरिष्ठ कविश्री सुभाष हुड़दंगी हास्य-व्यंगकार एवं उदीयमान कवि श्री मुरली मनोहर कपूर को अगीत श्री के सम्मान से विभूषित किया गया |अध्यक्षता अगीत के संस्थापक डा रंगनाथ मिश्र सत्य ने की, मुख्य अतिथि श्री विनोद चन्द्र विनोद पूर्व अध्यक्ष हिन्दी  संस्थान , विशिष्ठ अतिथि डा श्याम गुप्त थे |
इस अवसर पर कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया |
                 विशिष्ट  अतिथि डा श्याम गुप्त ने- गीत, अगीत, नवगीत आदि पर वक्तव्य देते हुए स्पष्ट किया की सभी काव्य के मूल व सनातन विधा गीत की ही शाखाएं हैं जो देश कालानुसार अपना विशिष्टरूप  लेता रहता है | अगीत को गीत नहीं के रूप में नहीं लिया जाता अपितु ले, गति व यति और भाव उसकी विशेषताएं हैं जो किसी भी रचना की होनी चाहिए , बस तुकांतता अनिवार्य नहीं है | उन्होंने अगीत की विभिन्न छंद-विधाओं का भी वर्णन किया |
          मुख्य अतिथि श्री विनोद चन्द्र पांडे ने काव्य एवं गीत के विहंगम रूप का दिग्दर्शन कराते हुए साहित्य व कविता की  सार्वकालीन महत्ता  एवं विभिन्न विधाओं की एकरूपता पर प्रकाश डाला | अध्यक्ष डा रंगनाथ मिश्र ने काव्य व साहित्य की सामायिक व वर्त्तमान युगीन आवश्कयताओं पर बल डाला एवं अगीत के महत्त्व को
रेखांकित किया |

श्री राम चन्द्र शुक्ल का सम्मान करते हुए श्री विनोद चन्द्र पांडे, डा सत्य एवं डा श्याम गुप्त एवं कविवर श्री  त्रिवेणी प्रसाद दुबे
श्रे सुभाष हुड़दंगी का काव्य पाठ
डा श्याम गुप्त का अगीत विधा पर वक्तव्य

मुख्य अतिथि श्री विनोद चन्द्र पांडे का वक्तव्य


डा रंगनाथ मिश्र सत्य का अध्यक्षीय भाषण एवं काव्य पाठ






काव्य गोष्ठी

सृजन संस्था के अध्यक्ष डा योगेश का काव्य पाठ एवं धन्यवाद ज्ञापन


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