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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

जाति-विहीन , वर्ग विहीन समाज नहीं अपितु जाति-वर्ग निरपेक्ष समाज.

एस आर दारापुरी का कहना है जाति विहीन व वर्ग विहीन समाज --विशेषता विहीन तत्व सिर्फ़ परमाणु अवस्था मैं ही होता है ,विभिन्न तत्व ,अणु, पदार्थ विशेषता धारण करने पर ही बनते हैं -क्या हम उन्नति छोड़कर पुनः वहीं पहुंचना चाहते है जहाँ से चले थ ? वस्तुतः जाति व समाज निरपेक्ष --अर्थात वे तो रहेंगे अपनी -अपनी विशेषताओं के साथ , देश समाज राष्ट्र हितार्थ - परन्तु उनके साथ भेद- भाव किसी स्तर पर नहीं हो । शरीर मैं प्रत्येक ऊतक व अंग का अपना -अपना महत्त्व है। इसी सत्य को जानें , समझें ,मानें ।

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