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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 29 अप्रैल 2012

बेंगलोर में सर्व भाषा कवि-गोष्ठी व मुशायरा" संपन्न ...एक रिपोर्ट ...डा श्याम गुप्त..

श्री ज्ञान चंद मर्मज्ञ जी ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए



श्रीमती सुषमा गुप्ता की ग़ज़ल.... video
 गज़लकार श्री नुसरत जी की ग़ज़ल---मंच पर अध्यक्ष इलियास राहत जी व विशिष्ट अतिथि डा श्याम गुप्त
                                       







डा श्याम गुप्त , लखनऊ..काव्य-पाठ करते हुए




                       
              अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच, जे पी नगर, बेंगलूर , कर्नाटक के तत्वावधान में व कविवर श्री ज्ञान चंद 'मर्मज्ञ' के संयोजकत्व में,  लायंस क्लब, जे पी नगर,फेज़-६, सरक्की के सभागार में माह के प्रत्येक  अंतिम रविवार को होने वाला काव्य-समारोह  दिनांक २९-५-१२ -रविवार को  संपन्न हुआ ।  प्रथम सत्र में  जनकवि  नागार्जुन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा संगोष्ठी  हुई जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने जनकवि नागार्जुन व उनके साहित्य पर अपने विचार प्रकट किये ।  द्वितीय सत्र में "सर्व भाषा कवि-गोष्ठी व मुशायरा"   संपन्न हुआ जिसमें विभिन्न भाषाओं के लगभग ५० से अधिक  शायर -शायरा  व कवि-कवयित्रियों  ने  काव्य पाठ किया।
                       यहाँ यह उल्लेखनीय है कि श्री ज्ञान चंद 'मर्मज्ञ' जी वर्षों से बेंगलोर में हिन्दी की मशाल जलाए रखने के साथ-साथ ही इस मासिक गोष्ठी को 'सर्व-भाषा मुशायरा व काव्य गोष्ठी' का रूप देकर राष्ट्रीय भाषाई एकता की भी अलख जगाये हुए हैं । इस गोष्ठी में देश की किसी भी भाषा में कविता पढी जा सकती है । अंग्रेज़ी में भी काव्य-पाठ के द्वारा यह गोष्ठी अंतर्राष्ट्रीय भाषाई एकता का भी प्रतिनिधित्व  करती  प्रतीत
होती है।          

2 टिप्‍पणियां:

veerubhai ने कहा…

बहुत बढ़िया कवरेज दी है आपने इस अखिल भारतीय क्या आलमी पर्व की .शुक्रिया .

कृपया यहाँ भी पधारें
सोमवार, 30 अप्रैल 2012

सावधान !आगे ख़तरा है

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http://veerubhai1947.blogspot.in/
रविवार, 29 अप्रैल 2012

परीक्षा से पहले तमाम रात जागकर पढने का मतलब

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रविवार, 29 अप्रैल 2012

महिलाओं में यौनानद शिखर की और ले जाने वाला G-spot मिला

http://veerubhai1947.blogspot.in/
शोध की खिड़की प्रत्यारोपित अंगों का पुनर चक्रण

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/शुक्रिया .
आरोग्य की खिड़की

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

ZEAL ने कहा…

Glad to read the news. Lovely pics. Congrats to all the poets who participated in the event.