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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

सम्पादकों के लेख

कमजोर प्रधान मंत्री की मज़बूती --हि समा आलेख हरजिंदर ----इस राजनेतिक आलेख पर हमें यहाँ नहीं कहना है। हमें कहना है किपहले समाचार पत्रों मैं एक ही सम्पादकीय होता था ,सम्पादक अपनी बात उसी मैं ही कहता था। शेष पत्र का स्थान समाचारों व अन्य विविध क्षेत्र के विद्वानों के विचारों के लिए होते थे ।
अब तो सम्पादक, उपसंपादक, सहायक -सभी स्वयं ही अपने लेख अपने ही पत्र मैं छपवाते रहते हैं। और ये सहायक सम्पादक में भी वरिष्ठ ,कनिष्ठ क्या है ?
लेखक ने एक जादूगर बांसुरी वाला -चूहों व बच्चों को मोहित करने वाली अंगरेजी कथा का जिक्र किया है , हिन्दी ,हिन्दुस्तान ,हिन्दुस्तानी कथाएं , कृष्ण की बांसुरी से मोहित होनेवाली गायों की कथा को कौन याद रखे ? और क्यों ?, भारतीयता की बातें -च ..च ..

बुधवार, 22 अप्रैल 2009

अतुकांत कविता --अगीत -रस ,छंद ,गति व लय.

बालू से सागर के तट पर ,
खूब घरोंदे गए उकेरे ।
वक्त की ऊंची लहर उठी जब ,
सब कुछ आकर बहा ले गयी ।
छोड़ गयी कुछ घोंघे -सीपी ,
सजा लिए हमने दामन मैं। ----प्रेम काव्य (प्रेम अगीत ) से लयबद्ध अगीत

सभी जीव मैं वही ब्रह्म है ,
मुझमें तुझमें वही ब्रह्म है।
उसी एक को समझ के सब मैं,
मान उसी को हर कण- कण मैं ।
तिनके का भी दिल न दुखाये ,
सो प्रभु को ,परब्रह्म को पाये। ----श्रृष्टि ,अगीत विधा महा काव्य से -शटपदीअगीत

शूर्प सुरुचिकर लंबे नख थे ,
रूपवती विदुषी नारी थी ।
साज श्रृंगार वेश भूषा से -
निपुण, विविध रूपसज्जा मैं ।
नित नवीन रूप सजने मैं ,
उसको अति प्रसन्नता होती । --शूर्पनखा काव्य उपन्यास से (छह पदी अगीत )

भ्रमर !
तुम कली- कली का ,
रस चूसते हो ,
क्यों ?
बगिया की गली -गली घूमते हो ,
क्यों ? ---अगीत। (भ्रमर गीत से )

और एक छह पदी सवैया --
प्रीति मिले सुखरीति मिले, धन- मीत मिले सब माया अजानी ।
कर्म की,धर्म की,भक्तिकीसिद्धि-प्रसिद्धि मिले सब नीति सुजानी ।
ज्ञानकीकर्मकी अर्थकी रीति ,प्रतीति सरस्वती-लक्ष्मी की जानी ।
रिद्धि मिली सब सिद्धि मिलीं, बहुभांति मिलीं निधि वेद बखानीं ।
सब आनंद -प्रतीति मिलीं , जग प्रीति मिली बहु भांतिसुहानी ।
जीवन गति सुफल -सुगीत बनी मन जानी , जग पहचानी ।। ---प्रेम काव्य से।

दोष मेरा है

वोट और मुद्दों पर डाक्टरों के विचार ,अध्यात्म की राह -उमा पाठक ,पोथी ही न पढाएं -जीवन मूल्य भी सिखाएं -पुष्पेश पन्त ; सभी पढ़कर लगता है किवास्तविक राय यही है कि ---
आज जब मैं हर जगह ,
छल द्वंद्व द्वेष पाखण्ड झूठ ,
अनाचार अत्याचार व अन्याय -
को देखता हूँ ;
उनके कारण और निवारण पर ,
विचार करता हूँ ,
तो मुझे लगता है कि -
दोषी मैं ही हूँ ,
सिर्फ़ मैं ही हूँ ।

आप लड़ें या झगडें ,
दोष चाहे एक दूसरे पर मढें,
दोष इसका है न उसका है न तेरा है ,
मुझे शूली पर चढादो ,
दोष मेरा है। --------काव्य मुक्तामृत से ।
स्थित सुधरेगी ,आशा बाकी है।

मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

धर्म, धरती और हम .

हिन्दुस्तान समाचार पत्रमैं कोई ने जगजीत सिंह उपरोक्त विषय पर कलम चलाई है। आपने -नानक, अबू बकर, मोहम्मद साहिब ,पर्शिया के मिर्जा हुसैन , बौद्ध मत, , बहाई धर्म, महावीर सभी का जिक्र किया है । हमें इन महापुरुषों के जिक्र व उनकी शिक्षाओं से कोई शिकवा नहीं --परन्तु , मिस्टर सिंह जी ! क्या आपको विश्व इतिहास के सबसे प्राचीन ,अमिट , महानतम , सर्व श्रेष्ठ -धर्म ,मत या विचार ,कोई जो कुछ भी समझे अपने -अपने ज्ञान -अनुभव ,श्रृद्धा,विश्वास के अनुसार --हिन्दू -सनातन धर्म का कोई ज्ञान नहीं ,या वह वर्णन योग्य नहीं , या जानबूझ कर ------
"तेरी रहमत का भी यारब कोई जवाब नहीं ।
कौन कहता है कि मौला तू लाजवाब नहीं ॥ "

सोमवार, 20 अप्रैल 2009

भरोसा पिता के काम का -पार्टी के नाम का

आपका अपना क्या है ? लोग पिता को पूछते तो है नहीं हाँ उनके नाम का सौदा करने से अवश्य नहीं चूकते ।

पिता ने ही लगादी रुबीना की बोली

यह तो होना ही था ,-अनाधिकारी को असमय ,अनायास प्रसिद्धि ,पैसा एवं आसमानी चाहूं की सीढीमिलती है तो यही होता है। स्लम -को करोड़पति का सपना यही है होना ।ये अनावश्यक कर्म समाज को यही रास्ते दिखलाते हैं।

राम राज्य और नफरत --एवं सोनिया गाँधी

सोनिया जी का कथन है किराम राज्य तो ऐसी शाशन प्रणाली है कि उसमें नफ़रत की कोई जगह नहीं है। क्या सोनिया जी राम , राज्य एवं नफरत का अर्थ सही मायने मैं समझतींहैं । नफरत - भी ईश्वर -कर्ता की एक कृति है -अवश्यम्भावी , परन्तु प्रत्येक भाव- वस्तुका समय व स्थिति अनुसार आचरण होना चाहिए । क्या उन्हें महात्मा गांधी याद नहीं जो कहते थे --घृणा बुराई से करो बुरे से नहीं । अर्थात -यथातथ्य । यदि राम रावणत्वसे घृणा /नफरत नहीं करते तो रावण के नाश को कृत संकल्प कैसे होते। ---यह है राम राज्य का अर्थ --यथा योग्य सम्मान ,न्याय व सुरक्षा । कृष्ण का कहना है- मैं दुष्टों के लिए कठोर व संतों के लिए साधुभावः हूँ।
नफरत करो तो , दुष्टता ,बुराई ,अन्याय ,अनाचार ,व्यसन व अपने दुर्गुणों से नफरत करो ।

बच्चों व गरीवों का क्या है वे तो सभी से मिलकर खुश हो जाते हैं ,उन्हें क्या पता कौन सोनिया कौन अडवानी ।