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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

सोमवार, 18 जनवरी 2010

अगीतोत्सव -२०१० एवं शूर्पणखा काव्य-उपन्यास का लोकार्पण



<---शूर्पणखा , कृति का लोकार्पण करते हुए, श्री रंगनाथ मिश्र सत्य,मुख्य अतिथि श्री राम चन्द्र शुक्ल,डा श्याम गुप्त , बाबा रवि कान्त खरे व श्री नरेश चन्द्र श्रीवास्तव , मध्य में अगीत विषय प्रवर्तन करते हुए डा श्याम गुप्त एवं दायें --> संचालन करते हुए डा सत्य ।
----दिनांक -१८-१-२०१० कों मैथमेटिकल स्टडी सिर्किल , राजाजी पुरम , लखनऊ में अखिल भारतीय अगीत परिषद् एवं सृजन साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में प्रति वर्ष की भांति ' अगीतोत्सव २०१०' मनाया गया । यह उत्सव प्रति वर्ष प्रसिद्द साहित्यकार , पूर्व न्यायाधीश श्री राम चन्द्र शुक्ल के जन्म दिवस पर मनाया जाता है। उत्सव में मुख्य अतिथि श्री राम चन्द्र शुक्ला व साहित्यकार डा श्याम गुप्त कों युवा कवियों व साहित्यकारों की संस्था 'सृजन' द्वारा सम्मानित भी किया गया । इस अवसर पर जनपद रायबरेली के वयोवृद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेन्द्र कुमार वर्मा की कृतियां ' बाल -वाटिका' तथा 'काव्य मंजूषा' एवं डा श्याम गुप्त के राम कथा पर आधारित अगीतविधा काव्य -उपन्यास ( खंड काव्य) "शूर्पणखा " का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ ।
समारोह के दूसरे चरण में " काव्य के बढ़ते चरण और अगीत " विषय पर परिचर्चा हुई , जिसका विषय प्रवर्तन डा श्याम गुप्त द्वारा किया गया । तत्पश्चात काव्य गोष्ठी भी सम्पन्न हुई। संचालन अगीत के प्रवर्तक डा रंगनाथ मिश्र सत्य ने एवं सृजन संस्था के अध्यक्ष डा योगेश गुप्ता ने किया, अंत में श्री धुरेन्द्र स्वरुप बिसारिया द्वारा धन्यवाद दिया गया। ----नीचे वीडियो में श्रीमती सुषमा गुप्ता जी 'शूर्पणखा ' की समीक्षा करती हुईं ।

1 टिप्पणी:

रचना दीक्षित ने कहा…

घर बैठे इतनी जानकारी व सुंदर कविता पाठ के लिए आभार