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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 20 जनवरी 2010

बसंत --डा श्याम गुप्ता --

नव बसंत आये

सखी री ! नव बसंत आये
जन जन में ,
जन जन जन मन में ,
यौवन यौवन छाये
सखीरी ! नव बसंत आये

पुलकि पुलकि सब अंग सखी री ,
हियरा उठे उमंग |
आये ऋतुपति पुष्प बाण ले ,
आये ऋतुपति काम बाण ले ,
मनमथ छायो अंग
होय कुसुम शर घायल जियरा ,
अंग अंग रस भर लाये |
सखी री नव बसंत आये

तन मन में बिजुरी की थिरकन ,
बाजे ताल मृदंग
अंचरा खोले रे भेद जिया के ,
यौवन उठे तरंग
गलियां पग पग झांझर बाजे ,
अंग अंग हरषाए
काम शास्त्र का पाठ पढ़ाने ,
ऋषि अनंग आये

सखी री नव बसंत आये

3 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

का डाक्टर साहब ईहाँ ठण्ड से हाड काँप रहा है और आप क बसंत सूझत बा

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

सुन्दर गीत है. वसन्तपंचमी की शुभकामनायें

श्रद्धा जैन ने कहा…

तन मन में बिजुरी की थिरकन ,
बाजे ताल मृदंग ।
अंचरा खोले रे भेद जिया के ,
यौवन उठे तरंग ।
गलियां पग पग झांझर बाजे ,
अंग अंग हरषाए ।
काम शास्त्र का पाठ पढ़ाने ,
ऋषि अनंग आये ।

waah
sunder geet

basantpanchami ki shubhkaamnaayen