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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 5 मई 2010

सामाज़िक सरोकार---- अंधी गलियां..ये भी कोइ केरिअर है...तथा नाटक .

.--दुनिया के सबसे पुराने धंधे -अदाएं दिखाकर व शरीर दिखाकर पुरुष या जग को लुभाना ( ग्लेमर)--के प्राचीन , पुराने रूप को समाप्त करने के लिए जाने क्या-क्या नहीं किया गया | अब उसी का नवीन , आधुनिक रूप, माडलिंग --करियर बनकर--बनाकर- सामने आरहा है, लाया जारहा है !!!! क्यों ?? इसी के भयावने प्रभाव ---कभी माल से गिरती क्षात्रा, कभी कवयत्री का मर्डर, कभी महिला क्षात्रावासों,सुधार गृहों में सेक्स रेकिट के रूप में बार-बार आपके सामने आता है। ----उंगली पकड़ कर हाथ पकड़ना पुरानी कहावत है ।

२.---आप चिल्लाते रहिये हिन्दी-हिन्दी-- आपके हिन्दी प्रदेश में ही, हिन्दुस्तानी जनता के लिए , हिन्दी का नाटक हम तो अंगेरजी शीर्षक में ही दिखाएँगे---डांस लाइक मैन---डेथ गेम ---सेल्स मेन राम लाल | तुर्रा यह कि हम सामाजिक सरोकारी लोग हैं | जब अंग्रेजों की ही कापी वाले नाटक हैं तो शीर्षक का क्या दोष |

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