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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शनिवार, 5 जून 2010

पर्यावरण दिवस पर श्याम गुप्त का एक पद...

पर्यावरण पर एक पद--

प्रभु तेरी पूजा वंदन को मैं कैसे आऊँ |
नदिया ताल नहर जल दूषित कौन सो नीर चढाऊँ |
चहुँ दिशि डीज़ल धुंआ प्रदूषण अँखियाँ नीर बहाऊँ |
सड़क चौराहे जाम लगे हैं कौन राहि चलि आऊँ |
गलियन -राह शोर अति कैसे घंटा ध्वनि सुनि पाऊँ |
खून खराबा ,लूट-पाट , घर- बाहर कैसे जाऊं |
तुम अपने घर, मैं अपने घर, गोविन्द गोबिंद गाऊँ ||

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सही!!

आचार्य जी ने कहा…

आईये जानें .... मन क्या है!

आचार्य जी

पापा जी ने कहा…

तुम अपने घर, मैं अपने घर, गोविन्द गोबिंद गाऊँ || (जिनके घर नहीं हैं वे क्या करेगें)

Dr. shyam gupta ने कहा…

पापाजी, कब के लिये हैं--सन्कट के दौर......