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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

सोमवार, 27 सितंबर 2010

नासमझी के गलत संदेश...डा श्याम गुप्त ...


-इस आलेख में लेखक का कथन कि---- १-गाँव का भारत /शहर का भारत; बन्चितों का भारत/शाइनिंग भारत आपस में लड़ रहे हैं , इस टकराव से इनकार नहीं किया जासकता
---क्यों भाई आखिर आप इसे टकराव मानते ही क्यों हैं , नासमझी का खेल है, पुराने नए में समन्वय क्यों नहीं कर /कह सकते ? टकराव तो वहां होता है जहां अहं होता है और नए का पुराने से अहं कैसा क्यों ? सीख व समझ क्यों नहीं?
-जिन हाथों में खेलहै वे पुराने भारत का प्रतिनिधित्व करते है, जो भ्रष्ट ,आलसी,अक्षम, अराजक.....पूरा मन्त्रि मन्डल’ सब चलता है’ का रवैयावालों से भरा है...
-----क्यों भाई, क्या मन्त्री, मुख्य मन्त्री,प्रधान मन्त्री -कल्माडी, चिदम्बरम( आधुनिक शिक्षा प्राप्त-कान्वेन्ट व विदेश में), सभी मन्त्री-मंडल( जिसमें युवाओं की भी भागी दारी है) सभी कामचोर ,भ्रष्ट,अक्षम आदि हैं-तो फ़िर क्यों आपने उन्हें देश चलाने के लिये चुना?---क्या आधुनिक युवा जो चोरी, लूट,बे ईमानी , डकैती, वलात्कार, हत्या, गिर्ल फ़्रेन्ड को लूट के माल से घुमाते हुए व महाभ्रष्टाचार में पकडे जारहे है वे नया भारत हैं, सक्षम हैं।------क्या चंद अन्ग्रेज़ी दां, ऊल-जुलूल घ्रणित खेल खेलते हुए, सट्टेबाज़ी से लिप्त, पैसे के लिये कुछ भी विग्यापन करते हुए, सारी विदेशी बस्तुएओं का ही भरपूर उपभोग करते हुए- युवा , नया भारत है ??
३-दुनिया भारत को दोस्त बनाने व निवेश करने को आतुर है.....
------क्या आप /दुनिया नहीं जानती एसा क्यों है--अपना बाज़ार बनाने के लिये अपनी सन्श्क्रिति आदि के गुप्त अजेन्डे को उतारने के लिये --कोई आपको मुफ़्त में दोस्त व निवेश भागीदार नहीं बनाता । आप स्वयं क्यों नही अपना बाज़ार/अर्थशास्त्र बनाते, अपनी संस्क्रित के अनुसार , बाहर का निवेश क्यों चाहिये। कमीशन के लिये?
----नसमझी के इन बिन्दुओं,विचारों,आलेखों से युवा , बच्चों व सामान्य जन में गलत संदेश जाता है कि पुराने व पुराने पीढी के लोगों को दूर करना चाहिये , वे नासमझ व असक्षम हैं। आखिर कब तक हम विदेशों के धन, विदेशी संस्क्रिति( नहीं कल्चर) पर आत्म मुग्धता व स्व-संस्क्रिति की अग्यानता के कारण, आत्म-कुन्ठा, स्व संस्क्रिति-दोषान्वेषण की घातक प्रव्रत्ति, पराभूत भाव दर्शाने से बाज़ आयेंगे।

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