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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 9 मार्च 2011

आज का प्रेरक वाक्य....डा श्याम गुप्त.....

....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...


             भारतवर्ष का धर्म उसके पुत्रों से नहीं , उसकी संस्कारवान कन्याओं से ठहरा हुआ है | यदि भारत की रमणियाँ अपना धर्म छोड़ देतीं तो अब तक भारत नष्ट होगया होता |
                                         ---महर्षि दयानंद सरस्वती .....

12 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

आपका ब्लॉग मुझे बहुत अछ्छा? लगा. ऐसा लगता है जैसे आप आँखे बंद करने अपनी लाइब्रेरी में किताब निकली , उसके बाद पुनः आँखे बंद करके उसे खोला , फिर जो पन्ना खुला उसे अपने ब्लॉग पर टीप दिया . डा साहब बिना किसी विषय क्रम के कुछ भी टीप देना ब्लोगरी नहीं कहलाती है .

बेनामी ने कहा…

देखता हूँ आप मेरी पिछली टिप्पणी अप्रूव करते हैं या नहीं ?

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही अर्थपूर्ण वाक्य।

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद पान्डे जी...सही है ग्यान का सागर इतना गहन होता है कि जो जानता है कि वह जानता है वही जान पाता है....

Dr. shyam gupta ने कहा…

अनोनीमस जी---क्या आज का यह वाक्य बिना विषय क्रम के है...क्या महिला दिवस पर इस वाक्य का क्रम आपको समझ नहीं आरहा....

---वैसे भी प्रेरक वाक्यों के लिये किसी क्रम या मुहूर्त की क्या आवश्यकता...प्रेरणा के लिये हर क्षण क्रम, अनुक्रम, विक्रम, पराक्रम का होता है.....

--आप अपना नाम "अ नोन म्यूज़" रख लीजिये...

बेनामी ने कहा…

अजी नाम का क्या है अनोनिमस से बदल कर अ नॉन म्यूज़ भी रख लेंगे. आप खुश रहें बस .
लेकिन इतना तो है कि आपका बर्दाश्त का लेवल बहुत कमजोर है
खैर, आगे भी आपको झिलाते रहेंगे.

Dr. shyam gupta ने कहा…

----हुज़ूर इस में झिलाने की क्या बात है...आप नोन म्यूज़र होकर तो हमको एम्यूज़ ही करेंगे...बधाई..

G.N.SHAW ने कहा…

सर मन चंगा तो कठौती में गंगा !

kshama ने कहा…

Bahut sundar1 Pahlee baar aapke blog pe aayee aur bahut achha laga!

Dr. shyam gupta ने कहा…

Thanks kshama ji

बेनामी ने कहा…

kya bat dr sahab koi nayi post nahiiii??????

Dr. shyam gupta ने कहा…

बाहर टूर पर था हुज़ूर, बस हाज़िर हुए....