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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

गज़ल---डा श्याम गुप्त....

                                                            ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
इक शब्द बोलने में वो यारो बड़े मगरूर |
क्या पढेंगे ख़त को मेरे कह दीजिये हुज़ूर |

दिल तोड़ना ही सदा जिनकी दास्ताने -दिल,
,दिल जोड़ने की देखिये, नाजो-अदा -गुरूर |

वो समझते हैं भला कब हुश्न का एसा भरम ,
खुश हैं वो ख्वावो-ख्याल में, 'वो हैं बड़े मशहूर' |

जिसने आँखों से न पी हो,वो भला समझे भी क्या ,
प्यास में कैसा नशा है,  इश्क में कैसा शुरूर  |

चाहत है दिल को तोड़ने की,  तोड़ दीजिये,
 श्याम तो इश्के-भरम में डूब के  मजबूर  |।

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इक शब्द बोलने में वो यारो बड़े मगरूर |
क्या पढेंगे ख़त को मेरे कह दीजिये हुज़ूर |

बड़ा सटीक कटाक्ष।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

दोस्तों, क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से (http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html )

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद पन्डे जी --सही पहुचे हुज़ूर....