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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

सोमवार, 23 मई 2011

डा श्याम गुप्त के पद....

                                                    ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
चलो रे मन ऐसे जग से दूर |
छीन झपट, आपा धापी और छल बल में जो चूर |
महल दुमहले राज भवन  सब हलचल से परिपूर |
मन की शान्ति न मिले यहाँ पर जग दुखिया मज़बूर |
ऊंचे -ऊंचे मंदिर-मठ हैं, मिले  न  प्रभु का  नूर |
भक्त-पुजारी, पण्डे-मूरत, ईश्वर से अति-दूर |
मन से प्रभु को 'श्याम, भजे तो आनंद सुख भरपूर || 

4 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मैं और मेरे परमेश्वर का एकान्त।

आशुतोष की कलम ने कहा…

मन से प्रभु को 'श्याम, भजे तो आनंद सुख भरपूर
श्याम तुम्हारे रूप में काशी काबा का नूर...

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद पान्डे जी---और एकान्त में..मैं और तू का भेद रहे ना..आनंद सुख भरपूर..

Dr. shyam gupta ने कहा…

सुन्दर..आशुतोष...श्याम के रूप अगले पद में...