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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

एक प्रयास यह भी ...हरिओम मंडल ..शान्तिनिकेतन बेंगलोर ....डा श्याम गुप्त ....



                                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

                  सत्कर्म के प्रसार -प्रचार में यदि एक व्यक्ति भी कहीं प्रयासरत है तो निश्चय ही इसे  घटाटोप अंधकार में  एक दीप जलाना  समझा जाना चाहिए और एक सराहनीय  प्रयास  | एसा ही एक अभिनव  प्रयास बैगलूर स्थित अपार्टमेन्ट प्रेस्टिज शान्तिनिकेतन के कुछ सक्रिय निवासियों द्वारा  'हरिओम मंडल ' की स्थापना करके किया जारहा है |
प्रेस्टिज शान्तिनिकेतन
क्लब हाउस 


हरिओम  मंडल की सदविचारयुक्त  दैनिक प्रार्थना
क्लब हाउस में हरिओम मंडल के सदस्य प्रार्थना करते हुए

                  इस मंडल का नित्य कर्म प्रातः ०६-६३०  से मिलकर भ्रमण, बेडमिन्टन आदि खेलना, योग करना व अंत में भजन -ध्यान, गीत गाना-सुनना आदि रहता है, जो मूलतः तो  स्वांत सुखाय है परन्तु निश्चय ही वातावरण में सदविचारों का प्रसार करता है |               
सदस्यगण योग क्रियाएं करते हुए
              श्री इंदौर के रतन चंद सुराना , नैनीताल के श्री जोशी, राजस्थान से होते हुए चेन्नई से आये श्री प्रकाश सुराना , महाराष्ट्र के श्री रूपवाल , हरियाणा से श्री ओपी गुप्ता , बनारस से श्री एम् पी मिश्रा  आदि , देश के विभिन्न स्थानों व विभिन्न सामाजिक /व्यवसायिक क्षेत्रों से आये व्यक्ति -माता-पिता, पेरेंट्स ,  बेंगलूर में कार्यरत अपने बच्चों के साथ  बेंगलूर में रह रहे हैं | एसे ही क्रियाशील लोगों ने यह हरिओम मंडल स्थापित किया है जो  लगभग ६०-७० वर्ष की वय के हैं |  यह प्रयास  स्वयं उन्हें तो सतत क्रियाशील रखता ही है, आचरण - ह्रास के इस युग में  वातावरण को भी  सदाचरण की और लेजाने के प्रयास में एक बिंदु की स्थापना करता है |




2 टिप्‍पणियां:

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत सुन्दर, सार्थक प्रस्तुति, आभार.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर प्रयास..