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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

सोमवार, 23 जुलाई 2012

नागपंचमी के निहितार्थ..... डा श्याम गुप्त

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
                        सावन का महीना शिव का महीना ..मंगल-उल्लास का माह ...जीवन्तता का माह है | शिव के साथ सर्प..नागों का सदैव विशेष सम्बन्ध रहा है जो  सामाजिक विष के नियमन का प्रतीक हैं |  इसीलिये शिव  पशुपति भी हैं,  कल्याण के प्रतीक भी |  इसीलिये नागपंचमी सावन के महीने में ही मनाई जाती  है |
                       नाग,  शेर, मोर, कौवा , गिद्ध , बाराह, कच्छप, बकरा, कुत्ता , घोड़ा, गाय ...तुलसी, पीपल, नीम ..बृक्ष..आदि सभी जीवों -प्राणियों, जीवों की पूजा करने वाली भारतीय संस्कृति ..बिचित्र व विशिष्ट  है | सब को अपने समान समझने के भाव वाली संस्कृति प्रत्येक जीव मात्र में देवता का बास मानती है | यह भाई चारा, विश्व-बन्धुत्व ..अहिंसा की  संस्कृति है ...विश्व में अनोखी |
                वह इसलिए कि भारतीय पुरा-ज्ञान के मूल  ..वैदिक साहित्य के अनुसार समस्त प्राणी-जगत कश्यप मुनि  की संतानें हैं |  सभी भाई- भाई हैं | जिसे विज्ञान के अनुसार कहा जाय तो--जल में मछली के उपरांत ..स्थल  पर आने वाले प्रथम जीव ---कच्छप से ही समस्त  जीव-जगत का.. मानव तक  उद्भव हुआ है |
               एसी अनोखी विशिष्ट संस्कृत के इस देश में आज ये हिंसा, द्वंद्व, द्वेष, अनाचार की स्थिति क्यों ? शायद इसलिए कि हम अपनी इस विश्व-वारा संस्कृति को भूल गए हैं ...उसकी जड़ों को भूल गए हैं ... पाश्चात्य जगत के संस्कृति व ज्ञान रूपी.. अति-भौतिक ज्ञान....अज्ञान ...को प्रश्रय देने के कारण |
                 अतः आज के दिन हम इस पर सोचें व समझें ...यही सच्ची नाग-पूजा...शिव-पूजा होगी | 

7 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति |
आभार श्रीमान जी ||

dheerendra ने कहा…

उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति,,,,

RECENT POST काव्यान्जलि ...: आदर्शवादी नेता,

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २४/७/१२ मंगल वार को चर्चा मंच पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कहा आपने..

सुशील ने कहा…

बहुत सुंदर !!

जरूरी हैं कुछ किताबें
अब भी सब के लिये
पढ़ लेते सुन लेते
समझ लेते कुछ
पुरानी हैं पर अभी
भी आत्मसात कर लेंते
तो जो हो रहा है
हर तरफ चारों ओर
कम से कम नहीं सहते
आगे भी बढ़ते और खुश रहते !!!

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद सुशील जी ...सही कहा जरूरी हैं कुछ किताबें ..जिन्हें हम पढना भूल गए हैं...

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद पांडे जी, राजेश जी, धीरेन्द्र जी व रविकर...