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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 25 जुलाई 2012

आखिर क्यों ???....डा श्याम गुप्त...

                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

आखिर  क्यों......................

 ----  पढने जा रहे हैं, पढकर बिजनेस सीखना है .... या अर्ध-जीन को भी ऊपर मोड कर स्पोर्ट शू ,बनियान टाइप  शोर्ट-टॉप-चप्पल पहन कर सुबह की सैर का,  घूमने का प्रोग्राम है...--  आखिर क्यों...?
---- डांस के लिए , पैरों-हाथों के मूवमेंट हेतु  टाईट -जीन उपयुक्त है या ढीले-ढाले कपडे ....... आखिर क्यों ..?
आखिर  क्यों ...कालेज में हैं या किसी पार्टी में ...पढने कालिज जारहे हैं या फैशन शो में....या लड़कों को प्रभावित करने...

7 टिप्‍पणियां:

veerubhai ने कहा…

डॉ .श्याम गुप्त जी आप मुख्य मंत्री और मंत्राणी की भाषा बोल रहें हैं कमसे कम एक डॉ की तवज्जो एनाटोमी नहीं होनी चाहिए औरत सिर्फ एक शरीर नहीं है .सिर्फ एक योनि नहीं है .

veerubhai ने कहा…

डॉ .श्याम गुप्त जी आप मुख्य मंत्री और मंत्राणी की भाषा बोल रहें हैं कमसे कम एक डॉ की तवज्जो एनाटोमी नहीं होनी चाहिए औरत सिर्फ एक शरीर नहीं है .सिर्फ एक योनि नहीं है .

veerubhai ने कहा…

डॉ साहब ऐसा तो शिव सेना भी नहीं कहती आप तो बाला साहब के ताऊ हो गये .

Dr. shyam gupta ने कहा…

बीरूभाई जी ...ऐसे कपडे पहन कर घूमने से तो यही लगता है कि ये सब यही समझते हैं कि .. स्त्री सिर्फ एक योनी है , शरीर है ...अतः कपड़ा पहने न पहने ..क्या फर्क पडता है...
---क्या मुख्यमंत्री या मंत्राणी आप की नज़र में मूर्ख लोग हैं...उन की राय की कोइ महत्ता नहीं है...?
----

Dr. shyam gupta ने कहा…

बीरूभाई जी ...ऐसे कपडे पहन कर घूमने से तो यही लगता है कि ये सब यही समझते हैं कि .. स्त्री सिर्फ एक योनी है , शरीर है ...अतः कपड़ा पहने न पहने ..क्या फर्क पडता है...
---क्या मुख्यमंत्री या मंत्राणी आप की नज़र में मूर्ख लोग हैं...उन की राय की कोइ महत्ता नहीं है...?
----

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सरल हो, सहज हो, स्वयं को अच्छा लगे और औरों को भी सुहाये..

Dr. shyam gupta ने कहा…

सही कहा पांडे जी ..

--वैसे क्या साड़ी सबसे सेक्सी पहनावा नहीं है ...परन्तु बदन उघाडू-दिखाऊ नहीं है ..