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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

सोमवार, 30 सितंबर 2013

जश्न मनाता चल ...ग़ज़ल..डा श्याम गुप्त ...

                                   ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

गमे-दिल को यूंही  गले लगाता चल |
दर्दे-दिल के  गीत यूंही गाता चल |

दर्द के नग्मे तूने सदा ही गाये हैं,
दर्द पाया है तो सीने में सजाता चल |

कौन एसा जिसे दर्दे-जिगर मिलता नहीं,
दिल को जो भाया उसे दिल में बसाता चल |

दर्द है दोस्त इंसा का इश्के-तूफां में,
दर्द पीकर भी दुनिया को हंसाता चल |

उनकी नेमत है सीने में सजाये रख श्याम ,
जाम अश्कों के पिए जश्न मनाता चल |

4 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन भरा उन्मुक्तता से

shyam gupta ने कहा…

क्या बात है पांडे जी.....

मन भरा उन्मुक्तता से मस्ती में गाता चल |

Ashok Satija ने कहा…

bakwaas kahoon yaa achcha kahoon...
samajh na aaye kya kahoon

shyam gupta ने कहा…

----jo ji main aaye kahiye......huzoor..ashok ji......

जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरत देखी सो तैसी |