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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

गुरु पूर्णिमा पर---- सूरज बन कर ज्ञान का, जब गुरु करे प्रकाश...ड़ा श्याम गुप्त ...

                                    ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...


गुरु पूर्णिमा पर----

गुरु

दावानल संसार में, दारुण दुःख अनंत,|
श्याम करे गुरु वन्दना, सब दुखों का अंत ||

सदाचार स्थापना, शास्त्र अर्थ समझाय।
आप करे सदआचरण, सो आचार्य कहाय॥

यदकिन्चित भी ग्यान जो, हम को देय बताय।
ज्ञानी उसको मानकर, फ़िर गुरु लेंय बनाय॥

इस संसार अपार को किस विधि कीजै पार।
श्याम गुरु कृपा पाइये, सब विधि हो उद्धार।।

अध्यापक को दीजिये, अति गौरव सम्मान।
श्याम करें आचार्य का, सदा दश गुना मान ॥

गु अक्षर का अर्थ है, अन्धकार अज्ञान।
रु से उसको रोकता, सो है गुरु महान ॥

जब तक मन स्थिर नहीं, मन नहिं शास्त्र विचार।
गुरु की कृपा न प्राप्त हो, मिले न तत्व विचार॥

आलोकित हो श्याम का,मन रूपी आकाश ।
सूरज बन कर ज्ञान का, जब गुरु करे प्रकाश॥

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