....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
तब---
हमारे कवि,कविता, नायक / महानायक व बच्चा -बच्चा इच्छा करता था कि ----
" देश राष्ट्र की आन हित
मरेंगे हज़ार बार "
"मुझे तोड़ लेना बनमाली ,
और उस पथ पर देना फैंक ।
मातृभूमि की लाज बचाने ,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक ।।"
"माँ मुझे भी सैनिक बनादो,
वर्दी सिलादो, बन्दूक लादो ।"
अब---
हमारा कवि , कविता, महानायक इच्छा करता है कि......
"यदि जन्म दुबारा मिले तो ,
गेंद का, बल्ले का, पिच का हिस्सा बनूँ मैं ।
चूरा चूरा चूना होना भी मुझे मंजूर है ।"
----है न वाह ! वाह ! करने की बात......... कहाँ जारहे हैं हम..कहाँ पहुँच गए हम...
तब---
हमारे कवि,कविता, नायक / महानायक व बच्चा -बच्चा इच्छा करता था कि ----
" देश राष्ट्र की आन हित
मरेंगे हज़ार बार "
"मुझे तोड़ लेना बनमाली ,
और उस पथ पर देना फैंक ।
मातृभूमि की लाज बचाने ,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक ।।"
"माँ मुझे भी सैनिक बनादो,
वर्दी सिलादो, बन्दूक लादो ।"
अब---
हमारा कवि , कविता, महानायक इच्छा करता है कि......
"यदि जन्म दुबारा मिले तो ,
गेंद का, बल्ले का, पिच का हिस्सा बनूँ मैं ।
चूरा चूरा चूना होना भी मुझे मंजूर है ।"
----है न वाह ! वाह ! करने की बात......... कहाँ जारहे हैं हम..कहाँ पहुँच गए हम...