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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त
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सोमवार, 15 अप्रैल 2013

सृजन साहित्यिक संस्था की नव-सम्वत्सर गोष्ठी ...डा श्याम गुप्त ...

                              ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...





डा सत्य- अध्यक्षीय वक्तव्य साथ में डा श्याम गुप्त  व डा.सुरेश शुक्ला




            

        लखनऊ के युवा साहित्यकारों की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था ‘सृजन’ की माह के प्रत्येक दूसरे रविवार को आयोजित मासिक गोष्ठी दि.१४-४-१३ रविवार को राजाजीपुरम के स्टडी-सर्कल के सभागार में सुप्रिसिद्ध कवि, साहित्यकार, गीतकार एवं  एवं अगीताचार्य डा रंगनाथ मिश्र ‘सत्य’ की अध्यक्षता में संपन्न हुई | गोष्ठी के मुख्य अतिथि डा श्याम गुप्त एवं विशिष्ट अतिथि डा सुरेश प्रकाश शुक्ल थे | संचालन युवा कवि एवं संस्था के सचिव देवेश द्विवेदी ‘देवेश’ ने किया |


डा योगेश गुप्त गोष्ठी का प्रारम्भ करते हुए
     गोष्ठी ने एक विद्वत-गोष्ठी का भी रूप का लेलिया जब गोष्ठी का प्रारम्भ करते हुए संस्था के अध्यक्ष डा योगेश ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नव-संवत्सर प्रारम्भ होचुका है परन्तु अधिकाँश लोग एवं युवा पीढी को यह ज्ञात ही नहीं है, वे तो सिर्फ जनवरी में आने वाले आंग्ल  नववर्ष को ही नया साल मानते हैं | नव-संवत्सर, देवता क्या हैं  एवं आज साहित्य की दशा पर कवियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये |


संचालक देवेष द्विवेदी ..कवि अशोक पांडे ,के के वैश्य व शांतानंद
    कविवर श्री रामप्रकाश एवं शांतानंद जी ने वाणी वन्दना की | कविवर डा योगेश, देवेश द्विवेदी, शांतानंद, विशाल श्रीवास्तव, कवियत्री सीमाक्षी श्रीवास्तव, छंदकार अशोक पाण्डेय ’अशोक’, कवि सूर्यप्रसाद मिश्र ‘हरिजन’, श्री कृष्ण वैश्य, अलंकार रस्तोगी, डा सुरेश प्रसाद शुक्ला आदि ने अपनी रचनाओं से गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की |  दिल्ली के वैदिक संस्कृत विद्वान् डा कृष्णानंद राय ने हिन्दी के अलावा संस्कृत में रचनाओं से भाव विभोर किया|


कवियत्री सीमाक्षी का काव्य पाठ एवं श्री सूर्यप्रसाद हरिजन, कृष्णानंद पांडे,विशाल श्रीवास्तव , अलंकर रस्तोगी
        मुख्य अतिथि के रूप में डा श्याम गुप्त ने अपने वक्तव्य में नव-संवत्सर की उत्पत्ति उसकी महत्ता बताते हुए उसे सनातन एवं वैज्ञानिक नववर्ष बताया और उसे व्याख्यायित करते हुए
पर नव-संवत्सर आधारित अपने दोहे पढ़े और आह्वान किया.....

        पाश्चात्य  नववर्ष  को, सब त्यागें श्रीमान |
        भारतीय  नववर्ष  हित, अब छेड़ें अभियान || 


      डा श्याम गुप्त ने आगे कहा कि डा योगेश गुप्त की चिंता स्वाभाविक है परन्तु हम सोचें कि आखिर क्यों हमारे युवा व अन्य सामान्य जन को अपनी सांस्कृतिक-बातों का ज्ञान नहीं है | शासन के अलावा विज्ञजनों में अगली पंक्ति में खड़े कवि व साहित्यकारों का भी यह कर्तव्य होता है कि जनसामान्य को अपनी रचनाओं द्वारा अपनी अपनी संस्कृति के बारे में ज्ञान दें एवं युवा कविओं के सम्मुख एक उदाहरण प्रस्तुत करें परन्तु आजकल ...समाचार वाली कवितायें, चुटुकुले वाले निरर्थक हास्य-व्यंग्य एवं  लम्बी-लम्बी वर्णानात्मक, कथ्यात्मक आदि निरर्थक कविताओं व कवियों का बोलवाला है जो सांस्कृतिक-सामाजिक परिप्रेक्ष्य का ज्ञान नहीं के बराबर सम्प्रेषण करती हैं | साहित्य के मूल गुणों की परिभाषा एक ग़ज़ल द्वारा प्रस्तुत की..

  
            साहित्य सत्यं शिवं सुन्दर भाव होना चहिये
            साहित्य शुचि शुभ ज्ञान  पारावार होना चाहिये
        

             श्याम, मतलब सिर्फ़ होना शुद्धता वादी नहीं,
             बहती दरिया रहे, पर तटबंध होना चाहिये



         अध्यक्षीय वक्तव्य में डा रंगनाथ मिश्र सत्य ने विविध कविताओं की समीक्षा की और अपने  सुन्दर सार्वकालिक गीत ‘जीवन की इस नयी डगर पर चलते चलते ठहर गया हूँ ‘ सुनाते हुए कहा कि निश्चय ही लम्बी-लम्बी कविताओं की अपेक्षा संक्षिप्त कविता का युग है इसीलिये ‘अगीत’ की महत्ता है |

          अंत में संस्था के अध्यक्ष डा योगेश ने धन्यवाद ज्ञापन किया |




 

मंगलवार, 14 अगस्त 2012

सृजन साहित्यिक संस्था का चतुर्थ वार्षिक साहित्योत्सव एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह .... डा श्याम गुप्त

                                              ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



लोकार्पित पुस्तक
                              लखनऊ की युवा साहित्यकारों की संस्था सृजन का वार्षिकोत्सव स्थानीय गांधी संग्रहालय के सभा-भवन में दि. १२-८-१२ को संपन्न हुआ |  जिसमें संस्था के संरक्षक हिन्दी कविता में अगीत-विधा के संस्थापक कविवर डा रंगनाथ मिश्र 'सत्य' को समर्पित पुस्तक  " साहित्य् मूर्ति  डा रंगनाथ मिश्र 'सत्य'"  का लोकार्पण हुआ तथा संस्था के वार्षिक सम्मान ---' सृजन साधना वरिष्ठ रचनाकार सम्मान'....लखनऊ के  कविवर  श्री सूर्य-प्रसाद  मिश्र  'हरिजन'  को  तथा  'सृजन साधना युवा रचनाकार सम्मान'.....गोंडा के  उदीयमान युवाकवि श्री जयदीप सिंह 'सरस' को प्रदान किया गया | इस अवसर पर डा रंगनाथ मिश्र सत्य का सारस्वत सम्मान भी किया गया
पुस्तक का लोकार्पण --श्री गधाधर नारायण, प्रोफ मौ.मुजम्मिल, विनोद चन्द्र पांडे ,महेश चन्द्र द्विवेदी , रामचंद्र शुक्ल, डा सत्य , डा योगेश व  देवेश द्विवेदी
                  समारोह की  अध्यक्षता  महाकवि श्री विनोद चन्द्र पांडे ने की, मुख्य अतिथि  रूहेल खंड विश्व-विद्यालय के कुलपति एवं देश के जाने-माने अर्थ शास्त्री व साहित्यकार श्री मोहम्मद मुजम्मिल थे | विशिष्ट अतिथि लखनऊ वि.वि के हिन्दी  विभाग की  पूर्व प्राचार्या प्रोफ. उषा सिन्हा, पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री महेश चन्द्र द्विवेदी , श्री गदाधर नारायण सिन्हा, पूर्व न्यायाधीश श्री राम चन्द्र शुक्ल थे |

                  संस्था के अध्यक्ष डा योगेश गुप्त ने अथितियों का स्वागत करते हुए संस्था के कार्यों व उद्देश्यों का विवरण दिया | संचालन संस्था के महामंत्री श्री देवेश द्विवेदी 'देवेश' द्वारा किया गया |  वाणी  वन्दना सुप्रसिद्ध संगीतकार श्रीमती कमला श्रीवास्तव द्वारा की गयी |
समाम्नित साहित्यकार--साथ में  डॉ योगेश गुप्त , प्रोफ. उषा सिन्हा व प्रोफ मौ.मुजम्मिल
                         समारोह के  मुख्य वक्ता  के रूप में वैदिक विद्वान श्री धुरेन्द्र स्वरुप बिसरिया,  वरिष्ठ कवि व साहित्यकार  डा श्याम गुप्त,   श्रीमती स्नेहप्रभा  एवं  संघात्मक समीक्षा पद्धति  के समीक्षक श्री पार्थोसेन  ने  साहित्य-मूर्ति डा रंगनाथ मिश्र 'सत्य'  तथा  सम्मान प्राप्त साहित्यकारों की साहित्य साधना की चर्चा की  एवं लोकार्पित पुस्तक प्रति अपने विचार रखे  | 
                         डा श्याम गुप्त  ने संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था  वरिष्ठ व युवा रचनाकारों के मध्य एक सेतु का कार्य कर रही है  जो हिन्दी, हिन्दी साहित्य  व राष्ट्र की सेवा का एक महत्वपूर्ण आयाम है|   अपने वक्तव्य  "'अगीत के अलख निरंजन डा रंगनाथ मिश्र 'सत्य' "  पर बोलते हुए उन्होंने डा सत्य के विभिन्न नामों व उपाधि-नामों पर चर्चा करते हुए बताया कि डॉ सत्य के आज तक जितने नामकरण हुए हैं उतने शायद ही किसी साहित्यकार के हुए हों |
                     इस अवसर पर बोलते हुए प्रोफ. मोहम्मद मुजम्मिल ने बताया कि जिस प्रकार देश में आर्थिक उदारीकरण  हुआ उसी प्रकार साहित्य में भी  काव्य में  उदारीकरण  डा रंगनाथ मिश्र  द्वारा स्थापित विधा अगीत ने   किया है |
                     सम्मानित  कवियों व डा रंग नाथ मिश्र द्वारा काव्य-पाठ भी किया गया | धन्यवाद ज्ञापन संस्था के उपाध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव  ने किया |



डा रंग नाथ मिश्र 'सत्य' - काव्य-पाठ


सोमवार, 22 अगस्त 2011

सृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, लखनऊ का वार्षिक सम्मान समारोह.... श्याम गुप्त

                                      ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

                लखनऊ के  युवा रचनाकारों की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था  'सृजन' का वार्षिक समारोह स्थानीय गांधी भवन के लाइब्रेरी हाल में दिनांक २१ अगस्त २०११ को संपन्न हुआ | सरस्वती पूजन व माल्यार्पण के पश्चात वाणी वन्दना प्रातिभ युवा कवि श्री सुभाष चन्द्र रसिया ने की | अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष डॉ योगेश गुप्त ने किया एवं संस्था की गतिविधियों व उसकी स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला  | संस्था द्वारा  नगर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार , रेलवे के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक  व सर्जन ड़ा श्याम गुप्त  को 'सृजन साधना वरिष्ठ रचनाकार सम्मान व युवा कवि श्री अखिलेश त्रिवेदी को सृजन साधना युवा रचनाकार सम्मान प्रदान किया गया |
ड़ा श्याम गुप्त को सम्मानित करते हुए पूर्व महानिदेशक पुलिस श्री महेश चन्द्र द्विवेदी एवं श्री विनोद चन्द्र पांडे  आई ऐ एस 

संस्था के उपाध्यक्ष परिचय पढते हुए
श्रीमती सुषमा गुप्ता परिचय पढते हुए
सम्मानित साहित्यकार ड़ा श्याम गुप्त व अखिलेश त्रिवेदी व मंचस्थ  डॉ सत्य, श्री द्विवेदी जी, सिन्हा जी, विनोद चन्द्र पांडे जी व अन्य



संस्था केअध्यक्ष ड़ा योगेश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन व साथ में महामंत्री देवेश कुमार देवेश व श्री पार्थो सेन

                  समारोह की अध्यक्षता अगीत विधा के संस्थापक ड़ा रंग नाथ मिश्र 'सत्य' ने की | मुख्य अतिथि श्री विनोद चन्द्र पांडे 'विनोद' आई ऐ एस पूर्व अध्यक्ष हिन्दी संस्थान, , विशिष्ट अतिथि श्री महेश चन्द्र द्विवेदी पूर्व डीजीपी लखनऊ, श्री गदाधर नारायण सिन्हा पूर्व डीजीपी  व श्री राम चन्द्र शुक्ल पूर्व न्यायाधीश थे |
                  संस्थाके उपाध्यक्ष श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव  व कवयत्री श्रीमती सुषमा गुप्ता ने ड़ा श्याम गुप्त का जीवन परिचय दिया एवं श्री गौरव दीक्षित 'मासूम' ने श्री अखिलेश त्रिवेदी का परिचय दिया |  प्रमुख वक्ताओं साहित्यकार व कवि  प्रोफ ओम प्रकाश गुप्त 'मधुर, कवयित्री श्रीमती स्नेह लता , सुषमा गुप्ता, श्री पार्थो सेन  व मशहूर शायर सुलतान शाकिर हाशमी  ने ड़ा श्याम गुप्त के रचना संसार व रचना धर्मिता की विशद रूप से चर्चा की |
            समारोह में उपस्थित  ड़ा आर के गुप्ता पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ,मंडल रेलवे  चिकित्सालय,  लखनऊ   ने भी ड़ा श्याम गुप्त के जीवन वृत्त व रचनाओं पर प्रकाश डाला |

           ड़ा श्याम गुप्त  व  श्री अखिलेश त्रिवेदी 'शाश्वत'  द्वारा काव्य-पाठ  किया गया | संस्था द्वारा अन्य कविगणों को भी सम्मानित किया गया | अध्यक्ष, मुख्य अतिथि व अन्य मंचस्थ वरिष्ठ विद्वानों ने काव्य जगत में सृजन जैसी युवाओं की संस्थाओं की अत्यंत आवश्यकता व उनके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए संस्था  के कार्य कलापों की भूरि -भूरि  प्रशंसा की | संस्था के अध्यक्ष ड़ा योगेश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया |