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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

मंगलवार, 21 जुलाई 2009

श्रृष्टि व जीवन -भाग ६ --मानव -वैदिक विज्ञान का मत

पिछली पोस्ट भाग - ५ में जीव,जीवन,बृद्धि, लिंग चयन स्वचालित मैथुन प्रक्रिया कैसे प्रारम्भ हुई इस पर आधुनिक विज्ञान का मत व्याख्यायित किया था। इस अंक में वैदिक विज्ञान का मत प्रस्तुत किया जारहा है|
ब्रह्मा ने समस्त प्राणियों ,देव,असुर,वनस्पति के साथ ही मानव का निर्माण किया ,यह सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ कृति थी जिसे सभी पुरुषार्थ ,धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष ) के योग्य पाया गया |यह क्रम इस प्रकार था-
----अ.मानस सृष्टि
----बी.संकल्प सृष्टि
----स.काम संकल्प सृष्टि
----द .मैथुनी (माहेश्वरी )प्रजा
१. सर्वप्रथम ब्रह्मा ने -सनक,सनंदन ,सनातन व सनत्कुमार --चार मानस पुत्र बनाए ,जो योग साधना हेतु रम गए।

२- पुनःसंकल्प से नारद,भृगु,कर्म,प्रचेतस,पुलह,अन्गिरिसि,क्रतु,पुलस्त्य,अत्री,मरीचि --१० प्रजापति बनाए
३.-पुनः संकल्प द्वारा पुत्र- भृगु ,मरीचि,पुलस्त्य,angira ,क्रतु,अत्रि,vashishth ,daksh ,पुलह एवं पुत्रियाँ --ख्याति,भूति ,सम्भूति,प्रीति,क्षमा प्रसूति आदि उत्पन्न कीं |
यद्यपि ये सब संकल्प द्वारा संतति प्रवृत्त थे परन्तु कोई निश्चित ,सतत ,स्वचालित प्रक्रिया क्रम नहीं था ( सब एकान्गी थे--प्राणियों व वनस्पतियों में भी ), अतः ब्रह्मा का सृष्टि क्रम व कार्य समाप्त नही हो paa rahaa था | ३-ब्रह्मा ने पुनः prabhu का स्मरण किया, तब अर्ध नारीश्वर( द्विलिन्गी) रूप ,में रुद्र देव जो शम्भु महेश्वर व माया का सम्मिलित रूप था,प्रकट हुए। जिसने स्वयम को --क्रूर-सौम्या; शान्त-अशान्त;श्यामा-गौरी;शीला-अशीला आदि ११ नारी भाव एवम ११ पुरुष भावों में विभक्त किया।रुद्रदेव के ये सभी ११-११ स्त्री-पुरुश भाव सभी जीवों में समाहित हुए,इस प्रकार काम श्रिष्टि का प्रादुर्भाव हुआ।
४- ब्रह्मा ने स्वयम के दायें-बायें भाग से मनु व शतरूपा को प्रकट किया,जिनमे रुद्रदेव के ११-११ नर नारी भाव समाहित होने से वे प्रथम मानव युगल हुए। वे मानस,सन्कल्प व काम सन्कल्प विधियों से सन्तति उत्पत्ति में प्रव्रत्त थे ,परन्तु अभी भी पूर्ण स्वचालित प्रक्रिया नहीं थी
५- पुनः ब्रह्मा ने मनु की काम सन्कल्प पुत्रियांआकूति व प्रसूति-को दक्ष को दिया।दक्ष को मानस श्रिष्टि फ़लित नहीं थी अतः उसने काम-सम्भोग प्रक्रिया से ५००० व १०००० पुत्र उत्पन्न किये ,परन्तु सब नारद के उपदेश से तपश्या को चले गये ।दक्ष ने नारद को सदा घूमते रहने का श्राप देदिया।
६।-पुनः दक्ष नेप्रसूति के गर्भ से -सम्भोग ,मैथुन जन्य प्रक्रिया से ६० पुत्रिओं को जन्म दिया,जिन्हें सोम,अन्गिरा,धर्म,कश्यप व अरिष्ट्नमि आदि रिशियों को दिया गया ,जिनसे मैथुनी क्रिया द्वारा,सन्तति से आगे स्वतः क्रमिक श्रष्टि क्रम चला,व चलरहा है। अतः दक्ष से वास्तविक श्रष्टि क्रम माना जाता है।
-- प्रथम मैथुनी क्रम प्रसूति से चला अतः गर्भाधान को प्रसूति एवन जन्म को प्रसव कहा जाता है।
- - शम्भु महेश्वर, इस लिन्गीय चयन व निर्धारण व काम-सम्भोग स्वतः उत्पत्ति प्रणाली के मूल हैं अतः इस श्रष्टि को "माहेश्वरी प्रज़ा या श्रष्टि " कहाजाता है। भला जबतक नारी भाव की उत्पत्ति न होती स्वतः श्रष्टि क्रम कैसे पूरा हो सकता था??
इस प्रकार ब्रह्मा का स्रष्टि क्रम सम्पूर्ण हुआ।

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