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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शनिवार, 12 सितंबर 2009

अन्तर --दो मुक्त छंद ------

--लेखनी और तलवार
तलवार और लेखनी में अन्तर है-
तलवार पहले काटती है ,
फ़िर खून बहाती है।
लेखनी ,पहले स्वयं काटी जाती है,
स्याही बहाती है,
फ़िर व्यक्ति को काटकर -
उसका खून सुखाती है॥

-- नाग और कलम
नाग और कलम ,दोनों ही दुमुंहे हैं-
कलम जेब में रखी जाती है ,
नाग भी आस्तीन में रहते हैं;
नाग,फुफकारता है ,
काटता है,
फ़िर विष छोड़ता है ;
कलम, स्याही सोखती है,
फ़िर छोड़ती है ,दौड़ती है,
फ़िर ,काटती है॥

4 टिप्‍पणियां:

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

बहुत तेज़ धार है

रचना दीक्षित ने कहा…

आप की धार तो पहले से ही तेज़ है.प्रेरित करने और मुझे पढ़ने के लिए आभार. मेरा एक लघु आलेख खबरिया चैनल रचनाकार में और एक बस के हादसों का शहर हिंदुस्तान का दर्द में प्रकाशित हुए हैं कृपया उन्हें भी पढ़ कर अपनी बेबाक राय दें
सादर रचना दीक्षित

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत ही शानदार मुक्तक हैं। बधाई स्वीकारें।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद