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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

डा श्याम गुप्त की दो गज़लें ----

हंसी
एक मज़ेदार  हंसी होती है ।
एक  वेज़ार   हंसी होती है।

हंसी खुशी में भी होती है ,
एक  नागवार हंसी होती है ।

हंसी की क्या बात यारो,
हंसी बस यार ! हंसी होती है।

हंसते हैं,   हंसाने वाले भी,
वो कैसी अजाब हंसी होती है।

खिलखिलादे जो हसीना कोई,
वो तो  नायाब हंसी होती है।

हंस के  चलदे जो हसीना ,
वो खुशगवार हंसी होती है ।

हंसी पै पलट के हंस दे कोई ,
श्याम' कामयाब हंसी होती है॥


प्रेम प्याला पीते रहो

नेकियाँ यूंही करते रहो।
ज़िंदगी यूंही जीते रहो।

कंकड़ पूजो, पत्थर पूजो,
प्रभु का नाम लेते रहो।

मूरत पूजो तीरथ जाओ,
गंगा यमुना नहाते रहो ।

काबा जाओ , काशी जाओ ,
प्रेम-प्याला पीते रहो।

खुदा कहो, ईश्वर, रब यारा,
जीने दो, श्याम' जीते रहो॥

6 टिप्‍पणियां:

Jandunia ने कहा…

हंसी पै पलट के हंस दे कोई ,
श्याम' कामयाब हंसी होती है॥
श्याम जी बहुत सुंदर रचना।

दिलीप ने कहा…

shi baat hai par aaj doosre doosron ki hansi pe hanste kahan hai....
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया !!

BrijmohanShrivastava ने कहा…

क्या बात है खुशी में भी आंखें भिगोते है आंसू ।आपने हंसी के बहुत से रूप प्र्स्तुत किये है तथा प्रेम का प्याला पीते रहो में तो बहुत सार की बात् कही है कहीं भी जाओ किसे भी पूजो बस नेकियां करते चलो बहुत अच्छी दौनो रचनायें

BrijmohanShrivastava ने कहा…

क्या बात है खुशी में भी आंखें भिगोते है आंसू ।आपने हंसी के बहुत से रूप प्र्स्तुत किये है तथा प्रेम का प्याला पीते रहो में तो बहुत सार की बात् कही है कहीं भी जाओ किसे भी पूजो बस नेकियां करते चलो बहुत अच्छी दौनो रचनायें

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद .