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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 19 अक्तूबर 2011

एक कवित्त छंद ...अमत्ता ...डा श्याम गुप्त....

                                      ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
( अमत्ता-कवित्त -- छंद में सभी वर्ण लघु होते हैं )

उठि सखि चलि  जलु भरनि जमुन तट ,
पुनि  चलि उपवन पुहुप सुघरि  चुनि |
चितव चितव इत उत् किहि लखि सखि ,
कनु  न मिलहि इत मधुवन चलि  पुनि |
अली जु रिसइ कहि अब न चलहुं,  पर-
उझकि-उझकि सुनि मुरलि-धरन  धुनि ।
लटकि लटकि लट सरकि सरकि पटु,
स्रवन  फ़रकि फ़र  कुंवर बयन सुनि  ॥ 








7 टिप्‍पणियां:

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut pyara chand likha hai.bahut umda.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर छन्द और सुन्दर वर्णन..

Babli ने कहा…

चितव चितव इत उत् किहि लखि सखि ,
कनु न मिलहि इत मधुवन चलि पुनि |
अली जु रिसइ कहि अब न चलहुं, पर-
उझकि-उझकि सुनि मुरलि-धरन धुनि ।
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! भावपूर्ण गीत ! लाजवाब प्रस्तुती!

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद राजेश कुमारी जी, पांडे जी व बबली....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत सुन्दर छंद रचा सर,
सादर बधाई...

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-673:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद , संजय एवं दिलबाग जी ..