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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

इन्द्रधनुषी विचारों के दरवार में ... प्रोफ. वी बै ललिताम्बा....

                                 ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
       इन्द्रधनुषी विचारों के दरवार में ... प्रोफ. वी बै ललिताम्बा ...पूर्व आचार्य ..अहल्या वि वि इंदौर ( म प्र)










4 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

आपके उपन्यास "इन्द्रधनुष" की बहुत अच्छी समीक्षा की प्रो० वी बै ललिताम्बा जी ने,...बधाई


MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ।।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मेडिकल कॉलेजों के बारे में यही अवधारणा है कि वहाँ पढ़ाई की नीरवता छायी रहती है।

Dr. shyam gupta ने कहा…

धन्यवाद धीरेन्द्र जी, रविकर जी एवं पान्डे जी जी....
--- जन्गल में ही तो मंगल करने की आवश्यकता होती है...नीरवता को जीवन्त करते रहने की कला आनी चाहिये जीवन में....तो जीवन सहज़ रहता है..