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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 1 अक्तूबर 2014

चला जारहा कौन …. डा श्याम गुप्त ..

                                 ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...


-3


कमर झुकाए लाठी टेके,

तन पर धोती एक लपेटे |

नंगे पैरों कठिन मार्ग पर

चला जारहा कौन |

                                चला जारहा मौन |


‘रघुपति राघव राजाराम,

पतित पावन सीताराम |’

मधुरिम स्वर लहरी में गाता,

चला जारहा कौन |

                                  चला जारहा मौन |


‘ईश्वर अल्लाह तेरे नाम

सबको सम्मति दे भगवान |’

हम सबको है एक्य बताता,

चला जारहा कौन |

                                   चला जारहा मौन…


ये तो अपने राष्ट्र पिता हैं,

ये तो अरे महात्मा गांधी |

ये तो विश्ववंद्य बापू हैं,

ये तो रे इस युग की आंधी |


ये तो कलियुग के मोहन हैं,

ये बच्चों के गांधी बावा |

ये भारत के लौह पुरुष हैं,

ये भारत के भाग्य विधाता |


पत्थर पर पदचिन्ह बनाता,

आज़ादी की राह दिखाता |

सारा जग है जिसके पीछे,

चला जारहा मौन |

                              चला जारहा कौन ||

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