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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त
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गुरुवार, 21 अगस्त 2025

रूस और भारत -प्राचीन काल से सम्बन्ध एवं अजेय रूस—वामन के तीन पग...------ डॉ. श्याम गुप्त =============================

....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 

 



रूस और भारत -प्राचीन काल से सम्बन्ध एवं अजेय रूस—वामन के तीन पग...------ डॉ. श्याम गुप्त
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***सन्दर्भ--रूस यूक्रेन युद्ध ***
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रामायण में महर्षि वाल्मीकि के अनुसार तीन पग में सारी पृथ्वी को नापते हुए – वामन अवतार ( विष्णु त्रिविक्रम ) का—
-----प्रथम पद भारत की पश्चिमी सीमा से ९० अंश पूर्व, इण्डोनेसिया (यवद्वीप सहित ७ मुख्य द्वीप) के पूर्व भाग न्यूगिनी ( धरती के पूर्वी छोर ) पर पड़ा।
------दूसरा पद उत्तर ध्रुव या मेरु पर पड़ा।
------तीसरा वापस भारत की पश्चिमी सीमा पर पड़ा। यथा—
त्नवन्तं यवद्वीपं सप्तराज्योपशोभितम्॥२९॥
यवद्वीपमतिक्रम्य शिशिरो नाम पर्वतः॥३०॥
तत्र पूर्वपदं कृत्वा पुरा विष्णुस्त्रिविक्रमे।
द्वितीयं शिखरे मेरोश्चकार पुरुषोत्तमः॥५८॥ - (रामायण, किष्किन्धा काण्ड, अध्याय ४०)

इस प्रकार वामन अवतार अर्थात महाराज बलि के समय भारत की सीमा उज्जैन ( २३N ७५ E ) से ४५ अंश पश्चिम से ४५ अंश पूर्व तक था। अर्थात ईरान से पूर्वी द्वीप समूह –न्यूगिनी पापुआ तक एवं लंका से उत्तरी ध्रुव मेरु, पामीर, तिब्बत तक( –चित्र १ )
अखंड भारत वर्ष वामन अवतार द्वारा तीन पग भूमि

उस काल में त्रिलोक पति स्वर्ग के अधिपति इन्द्र का राज्य भारत, चीन और रूस तक विस्तृत था । तिब्बत,सुमेरु से उत्तरी भाग में (आज के उज़बेकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजकिस्तान आदि क्षेत्र )स्वर्गलोक, इन्द्रलोक व देवलोक आदि थे एवं यह समस्त भाग जम्बू द्वीप के अंतर्गत था |
------ इस प्रकार भारतीयों ( देव व मानव )की गति रूस (कुरु वर्ष ) चीन (हरिवर्ष ) तक थी | वामन भगवान् ने यह सारी भूमि महाराज बलि से लेकर देवताओं ( पुनः इंद्र को ) को देदी |
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उत्तर-कुरु लोगों का हरिवर्ष( रूस-लाल मुख वाले बानरों की भाँति मुख वाले रूसी लोग ) में रहना सिद्ध होता है। यह हरिवर्ष अब(चीन ) उत्तरीय ध्रुव के समीपवर्ती वृत्त के अन्तर्गत नहीं है। यह बहुत ही दक्षिण की ओर हटकर मानसरोवर के प्रदेशों के उत्तर में (चीन ) बतलाया जाता है।
महाभारत में रूस को अजेय कहा गया है ---
वर्षं हिरण्यकं नाम विवेशाथ महीपते।
अथ जित्वा समस्तांस्तान् करे च विनिवेश्य च।
शृङ्गवन्तं च कौन्तेयः समतिक्रम्य फाल्गुनः
उत्तरं कुरुवर्षं तु स समासाद्य पाण्डवः। (उत्तरं हरिवर्षन्तु स समासाद्य पाण्डवः।)
इयेष जेतुं तं देशं पाकशासननन्दनः॥७॥—-
पार्थ नेदं त्वया शक्यं पुरं जेतुं कथञ्चन।
उपावर्तस्व कल्याण पर्याप्तमिदमच्युत॥९॥
पार्थिवत्वं चिकीर्षामि धर्मराजस्य धीमतः।..
युधिष्ठिराय यत्किंचित् करपण्यं प्रदीयताम्॥
ततो दिव्यानि वस्त्राणि दिव्यान्याभरणानि च।
क्षौमाजिनानि दिव्यानि तस्य ते प्रददुः करम्॥१६॥
(महाभारत सभा पर्व, अध्याय २८-अर्जुन दिग्विजय)
इससे उत्तर जाने पर उन्हें हरिवर्ष मिला। यहाँ महाकाय, महावीर्य द्वारपालों ने इनकी गति अनुनय-विनय करके रोक दी। उन लोगों ने कहा कि यहाँ मनुष्यों की गति नहीं, यहाँ उत्तर-कुरु के लोग रहते हैं; यहाँ कुछ जीतने योग्य चीज़ भी नहीं। यहाँ प्रवेश करने पर भी, हे पार्थ, तुम्हें कुछ भी नज़र नहीं आयेगा और न मनुष्य तन से यहाँ कुछ दर्शनीय ही है। उन लोगों ने पुनः पार्थ की मनोवांछा की जांच की। पार्थ ने कहा कि मैं केवल धर्मराज युधिष्ठिर के पार्थिवत्व का स्वीकार चाहता हूँ। इसलिये युधिष्ठिर के लिये कर-पण्य की आवश्यकता है। यह सुनकर उन लोगों ने दिव्य-दिव्य वस्त्र, क्षौमाजिन तथा दिव्य आभरण दिये।
------- हिरण्यक वर्ष = रूस (हिरण्य या लाल रंग वाला देश ), शृङ्गवान् पर्वत (रूस की पूर्वी सीमा पर यूराल पर्वत), उत्तर कुरु वर्ष ( कुरुओं के शिविर या साइबेरिया का मध्य भाग) इससे उत्तर जाने पर उन्हें हरिवर्ष मिला। यहाँ महाकाय, महावीर्य द्वारपालों ने इनकी गति अनुनय-विनय करके रोक दी। उन लोगों ने कहा कि यहाँ मनुष्यों की गति नहीं, यहाँ उत्तर-कुरु के लोग रहते हैं;
उत्तर कुरु को ओम्(भारतीय संस्कृति में प्रत्येक कृतित्व का प्रारंभ ॐ से होता है --रूसी भाषा में ओम्स्क) कहते थे। ओम्स्क नगर प्राचीन शून्य देशान्तर रेखा पर था। इस रेखा पर उज्जैन एवं उसके उत्तर में उत्तर भारत का प्रमुख नगर कुरुक्षेत्र था। सबसे उत्तर का मुख्य नगर उत्तर कुरु था। यहां से पूर्व पश्चिम दिशा में देशान्तर माप का आरम्भ होता है |
वहां के लोगों ने अर्जुन से कहा कि यह जीता नहीं जा सकता है, अतः कुछ उपहार दे कर विदा किया। ये दिव्य वस्त्र थे अर्थात् अति शीत में पहनने के कपड़े जिनकी भारत में कभी आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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आधुनिक युग में नेपोलियन तथा हिटलर दोनों की दिग्विजय यात्रा रूस के ही विशाल हिम भूमि में फंस कर रह गयी थी।
2.
रूस और भारत साम्य ---
रूस ने कभी दास व्यापार नहीं किया। बल्कि वहां की जनता तुर्की के लुटेरों द्वारा गुलाम बना कर बेची जाती रही। उससे रूस को इवान तथा पीटर महान् ने मुक्त कर साम्राज्य का विस्तार किया। पर रूस में कभी भी पोलैण्ड, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान आदि के निवासियों को रूस का गुलाम नहीं माना गया। सबके लिए एक ही कानून रहा।
यह भारतीय साम्राज्यों जैसा था व है । आज का रूस का यूक्रेन युद्ध भी उसे अखण्ड करने के लिए है। ब्रिटेन अमेरिका की तरह अकारण नरसंहार नहीं है।
--------वर्तमान आक्रमण में भी रूस ने यथासम्भव कम हत्या की है तथा भारतीय छात्रों को निकलने की सुविधा दी है।
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अमेरिका व यूरोप सदा षड्यंत्रकारी --
यूक्रेन को पाश्चात्य षड्यन्त्र द्वारा रूस से अलग किया गया तथा रूस विरोधी शासन स्थापित किया गया है। यह मूल रूस का मुख्य भाग था तथा दोनों देशों में एक ही जति है।
---रूस पर साम्राज्यवाद का आरोप लगता है। पर रूस का साम्राज्य कभी उपनिवेशवाद नहीं रहा। १९७१ में भी अमेरिका तथा ब्रिटेन दोनों के संयुक्त नौसैनिक आक्रमण से रूस ने ही भारत की सैनिक सहायता की थी।
---- ब्रिटेन, स्पेन, पुर्तगाल, बेल्जियम या नीदरलैण्ड ने जहां अपने उपनिवेश कियॆ वहां के मूल निवासियों का पूर्ण संहार किया,यथा उत्तर, दक्षिण अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया को निर्मूल करना |
---अफ्रीका के भी आधे से अधिक लोगों का संहार किया तथा गुलाम बना कर बेचा। अन्य देशों में भी वहां के निवासी गुलाम ही रहे, केवल कुछ दलालों को नेता बना कर रखा।
अमेरिका को कोरिया से कोई खतरा नहीं था पर वहां आक्रमण कर लाखों लोगो की हत्या की तथा आज तक उसके २ खण्डों को मिलने नहीं दिया।
इसी प्रकार वियतनाम को विभाजित रखने के लिए वहां बाढ़ सहायता के नाम पर अमेरिकी सेना गयी और १० लाख से अधिक लोगों की हत्या की।
विख्यात जालसाज ब्रिटेन ने कहानी बनायी कि ईराक में नरसंहार के हथियार हैं और इस बहाने से ईराक पर आक्रमण कर सद्दाम हुसेन सहित १० लाख से अधिक लोगों की हत्या की।
भारत को भी विभाजित कर ३० लाख लोगों की हत्या कराई तथा २ करोड़ लोगों को विस्थापित किया।
यूरोप में भी चेकोस्लोवाकिया को विभाजित कर वहां युद्ध कराया, जिससे हथियार बिक्री द्वारा आय होती रहे।
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कहने का अर्थ है कि रूस यूक्रेन युद्ध में रूस आक्रमणकारी व दोषी नहीं अपितु अमेरिका एवं सदा विस्तारवादी योरोप ही जिम्मेदार है |
चित्र---अखंड भारत वर्ष एवँ वामन अवतार द्वारा तीन पग भूमि





शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----डा श्याम गुप्त

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 
हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----

१.--मिस्र में ६००० वर्ष पुराना शिवलिंग




२.अफ्रीका-६००० वर्ष –शिव लिंग
४.  --फराहो—मिस्र –नंदी की पूजा 
५. चीन में हिन्दू मंदिर के खंडहर

६.शिव पार्वती , चीनी बौने के साथ एवं चीनी ड्रेगन –बादामी, कर्नाटक भारत

७. हिन्दू मंदिर अज़र्बेजान            

८. माता का त्रिशूल ..अज़र्बेजान मंदिर
९. आयरलेंड में  तारा पर्वत पर ---शिवलिंग पूजा
१० स्वास्तिक –बुल्गारिया में 
११.  यह विष्णु मूर्ति पाई गई। वर्षों से उत्खनन कर रहे समूह के डॉ. कोजविनका कहना है कि मूर्ति के साथ ही अब तक किए गए उत्खनन में उन्हें प्राचीन सिक्केपदकअंगूठियां और शस्त्र भी मिले हैं।
 १२.देवताओं का किला ----तुर्कमेनिस्तान 
 १३.हरप्पा टाइप सील---रूस 


१४.मंगोलिया में , सिवा नखलिस्तान में नमक पीसती हुई लड़की ,चाकी से ---जो भारतीय विशेषता है







५.अफ्रीकी में हिन्दू -- साउथ अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि आज से 6 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीकी लोग भी हिंदू धर्म का पालन करते थे।
-------साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नामक एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव की 6 हजार वर्ष पुरानी शिवलिंग की मूर्ति मिली जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता हैरान हैं कि यह शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रहा।
                                   
                               


                   



६.चीन में हिन्दू : चीन के इतिहासकारों के अनुसार चीन के समुद्र से लगे औद्योगिक शहर च्वानजो में और उसके चारों ओर का क्षे‍त्र कभी हिन्दुओं का तीर्थस्थल था। वहां 1,000 वर्ष पूर्व के निर्मित हिन्दू मंदिरों के खंडहर पाए गए हैं। इसका सबूत चीन के समुद्री संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां हैं।
वर्तमान में चीन में कोई हिन्दू मंदिर तो नहीं है, लेकिन 1,000 वर्ष पहले सुंग राजवंश के दौरान दक्षिण चीन के फुच्यान प्रांत में इस तरह के मंदिर थे लेकिन अब सिर्फ खंडहर बचे हैं।

७.यजीदी हिन्दू है? यजीदी धर्म भी विश्व की प्राचीनतम धार्मिक परंपराओं में से एक है। इस कुछ इतिहासकार हिन्दू धर्म का ही एक समाज मानते हैं। यजीदियों की गणना के अनुसार अरब में यह परंपरा 6,763 वर्ष पुरानी है अर्थात ईसा के 4,748 वर्ष पूर्व यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों से पहले से यह परंपरा चली आ रही है। यजीदियों की कई मान्यताएं हिन्दू और ईसाइयत से भी मिलती-जुलती हैं। ईसाइयत के आरंभिक दिनों में मयूर पक्षी को अमरत्व का प्रतीक माना जाता था। बाद में इसे हटा दिया गया।
----हिन्दुओं की तरह ही यजीदियों में जल का महत्व है। धार्मिक परंपराओं में जल से अभिषेक किए जाने की परंपरा है। तिलक लगाते हैं और अपने मंदिर में दीपक जलाते हैं। हिन्दू देतता कार्तिकेय जैसे दिखाई देने वाले देवता की पूजा करते हैं। उनके मंदिर और हिन्दुओं के मंदिर समान नजर आते हैं। पुनर्जन्म को मानते हैं। यजीदी अपने ईश्‍वर की 5 समय प्रार्थना करते हैं। सूर्योदय व सूर्यास्त में सूर्य की ओर मुंह करके प्रार्थना की जाती है। स्वर्ग-नरक की मान्यता भी है। धार्मिक संस्कार कराने वाले विशेषज्ञों की परंपरा है। व्रत, मेले, उत्सव की परंपरा भी है। समाधियां व पूजागृह (मंदिर) भी हैं।



 ७.रूस में हिन्दू : एक हजार वर्ष पहले रूस ने ईसाई धर्म स्वीकार किया। इससे पहले यहां वैदिक पद्धति के आधार पर हिन्दू धर्म प्रचलित था।
-----रूस में आज भी पुरातत्ववेताओं को कभी-कभी खुदाई करते हुए प्राचीन रूसी देवी-देवताओं की लकड़ी या पत्थर की बनी मूर्तियां मिल जाती हैं। कुछ मूर्तियों में दुर्गा की तरह अनेक सिर और कई-कई हाथ बने होते हैं। रूस के प्राचीन देवताओं और हिन्दू देवी-देवताओं के बीच बहुत ज्यादा समानता है।
---- प्राचीनकाल में रूस के मध्यभाग को जम्बूद्वीप का इलावर्त कहा जाता था। यहां देवता और दानव लोग रहते थे।
कुछ वर्ष पूर्व ही रूस में वोल्गा प्रांत के स्ताराया मायना (Staraya Maina) गांव में विष्णु की मूर्ति मिली थी जिसे 7-10वीं ईस्वी सन् का बताया गया। यह गांव 1700 साल पहले एक प्राचीन और विशाल शहर हुआ करता था।
            

 --- माना जाता है कि रूस में वाइकिंग या स्लाव लोगों के आने से पूर्व शायद वहां भारतीय होंगे या उन पर
भारतीयों ने राज किया होगा।
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------टाइटन्स( जिन्हें असुर कहा जाता था ) वे महान शिव भक्त थे रावण की भाँति... | जन कथाओं के अनुसार  ब्रोंज(कांसा)बनाने की शक्ति वाला देवता लेकर आया था जो देवी दनु के पुत्र थे | अर्थात कश्यप की पत्नी दनु( दक्ष पुत्री ) के पुत्र जो सारी आयरलेंड में राज्य करते थी एवं डेन्यूब नदी (दनु नदी )के किनारे किनारे सारे योरोप में ----दनु के पुत्र दानवसमस्त योरोप में डेन्यूब नदी के किनारे किनारे बसे | डेन्यूब नदी योरोप के विभिन्न देशों में दुनाज़,दूना,दुनेव,दुनारिया,आदि नामों से जानी जाती है | यह योरोप की सबसे बड़ी नदी है वोल्गा के बाद |

-----यह विष्णु की मूर्ति शायद वही मूर्ति है जिसे ललितादित्य ने स्त्री राज्य में बनवाया था। चूंकि स्त्री राज्य को उत्तर कुरु के दक्षिण में कहा गया है तो शायद स्ताराया मैना पहले स्त्री राज्य में हो।

----चित्र गूगल व निर्विकार -----
निर्विकार  पंकज श्याम -
 -------क्रमश --भाग चार --