मैं आत्म हूँ ,
सर्व भूतेषु आत्मा ;
जड़ जंगम जीव में अवस्थित
उनका स्वयं , उनका अंतर ।
प्रत्येक भूत का लघुतम अंश या कण
विज्ञानियों का एटम या परमाणु ,
मैं ही हूँ ;
मैं एटम का भी आत्म हूँ ,
उसकी क्रियाशीलता, क्षमता, आत्मा
मैं आत्म हूँ ।
सब मुझमें है, मैं सब में हूँ ,
परिभू, स्वयं भू ;
सृष्टि से पहले भी ,सृष्टि के अंतर में,सृष्टि के बाद भी,
मैं आत्म हूँ।
अक्रिय,अकर्मा, अव्यक्त, अविनाशी ,असद चेतन सत्ता,
कारणों का कारण , कारण ब्रह्म, परब्रह्म ;
दृष्टियों की दृष्टि,दृष्टा, परात्पर,
'वेदानामपि गायन्ति'
मैं आत्म हूँ।
सृष्टि हितार्थ भाव संकल्प मैं ही हूँ,
आदि नाद से व्यक्त सगुण ब्रह्म -
ईश्वर, परमात्मा , हिरण्यगर्भ मैं ही हूँ ;
मैं आत्म हूँ।
'एकोहम बहुस्याम ' जनित -ओउम ,
व्यक्ति आदि शक्ति,अपरा , माया -
प्रकृति व जगत की प्रसविनी शक्ति -
मैं ही हूँ , और-
परा रूप में -
प्रत्येक जड़, जीव, जंगम में प्रविष्ट ,
उनका स्वयं , उनका अहं म चेतन तत्व , आत्म तत्व मैं ही हूँ ;
मैं आत्म हूँ ।
जीवधारी, प्राणधारी रूप में-
जीवात्मा, प्राण, आत्मा ,
कर्मों का कर्ता ,
सुख-दुःख लिप्त फलों का भोक्ता
संसार चक्र उपभोक्ता मैं ही हूँ ,
मैं आत्म हूँ।
सत्कर्म संचित -
ज्ञान, बुद्धि, मन ,संस्कार प्राप्त -
मानव, मैन ,आदम, मनुष्य मैं ही
हूँ;
मुक्ति,मोक्ष,कैवल्य आकांक्षी ,
मुक्ति प्राप्त, आत्मलीन,हिरण्यगर्भ लीन
परमात्व तत्व मैं ही हूँ ।
लय में -'अनेक से एक' इच्छा कर्ता-
प्रकृति , संसार, माया को स्वयं में लीन कर,
पुनः -अक्रिय, असत,अव्यक्त,सनातन,
परब्रह्म मैं ही हूँ।
ईश्वर, जीव , माया,ब्रह्म ,
सार,असार, संसार
शिव विष्णु ब्रह्मा
सरस्वती लक्ष्मी काली
शिव और शक्ति
पुरुष और प्रकृति
जड़ जीव जंगम --मैं ही हूँ
मैं आत्म हूँ,
मैं आत्म हूँ ॥