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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

प्रेरक वाक्य---डा श्याम गुप्त....

                                                                                           ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...   
ऋतेन गुप्त ऋतुभिश्च सर्वेभूतेन गुप्तो भव्येन चाहम |
मा मा प्रापत पाप्मा मोत मृत्युरंतर्दधेहं सलिलेन वाच:|| -------अथर्व वेद १७/१/२९ ....

---- सत्यकर्म और धर्माचरण से ही  जीवन( संसार ) सुरक्षित रहता है | हम समस्त विश्व( के जड़- जंगम, प्राणियों)  की सुरक्षा की इच्छा करते हैं , सुरक्षा चाहते हैं, सुरक्षा की इच्छा करें | अत: हम सदैव निष्पाप व यशस्वी बनें ( अयश व पाप को प्राप्त न हों, अनुचित  कर्म न करें  ) हम सदैव (मृत्युपर्यंत ) ही जल की भाँति निर्मल मन से कार्य करते हुए उच्च ज्ञान प्राप्त करते रहें |

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के कारण..मीडिया --.३- समाचार......डा श्याम गुप्त.....

                                                                                            ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
   समाचार गुणात्मक होने चाहिये न कि व्यर्थ के जिनका हम से, हमारे समाज से , देश से , सन्स्क्रिति से कोई मतलब न हो और समाज सन्स्क्रिति के लिये विघटनात्मक हों.... अब देखिये कुछ समाचारों की बानगी....
१-युवा चाहते है कम किराये में बस सेवा....  कौन नहीं चाहेगा ? क्या यह कोई समाचार है? फ़िर क्यों युवाओं से निरर्थक सवाल पूछे जायं, जिन्हें अभी पढने -लिखने में समय लगाना चाहिये न कि इन सवालों में जिसका अभी उन्हें कोई ग्यान ही नहीं, बडों का, शासन का यह कर्तव्य है । क्या हम युवाओं के मन में यह सोच डालना चाह्ते हैं कि आपके बडे नाकारा हैं अब आप ही बताइये हल...
२-पेरेन्ट बनें सपोर्ट सिस्टम... क्या सदा से ही माता-पिता बच्चों के सपोर्ट-सिस्टम नहीं है?...भारत में तो हैं..किसी कानून के बिना भी... अपनी शक्ति भर, यथायोग्य सभी माता-पिता बच्चों के भले ,उनकी तरक्की के लिये प्रयास करते हैं....यह विदेशी विचार है जहां माता-पिता ,कानून के डर से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं।......इस प्रकार के समाचार बच्चों में  और असीमित  अपेक्षायें व माता-पिता के विरुद्ध अवग्या भाव उत्पन्न होते हैं ...जो भविष्य के अनाचरण के कारण हैं...
३- विशेष्ग्यता से सम्बन्धित समाचारों का सिर्फ़ वह भाग ही प्र्दर्शित हो जिससे जनता को सीधा मतलब हो----देखिये .... अ-लखनऊ के पानी में नाइट्रेट की मात्रा चिन्ताजानक....क्या इस जानकारी का सामान्य जनता से कोई मतलब है...यह एक विशेषग्य ग्यान है और उन्हीं को जानना व उचित व्यवस्था करनी है....व्यर्थ के समाचार द्वारा  सामान्य जन में घबराहट फ़ैलाने से क्या लाभ...क्या वे पानी पीना बन्द करदें...फ़िर क्या करें....क्या करपायेंगे..?ब सुपर बग से डरिये मत..यदि कोई डर है ही नहीं तो उसे जनता को अखबार में बताने की ही क्या आवश्यकता है---भ्रम, भय व अनास्था फ़ैलाने का जरिया हैं येऔर चिकित्सा-जगत में भ्रष्ट आचरण प्रारम्भ के कारक... स-चिकिन पोक्स से डरिये नहीं हटाइये---सामान्य जनता क्या चिकिन पोक्स को हटा सकती है..यह विशेष्ग्यों का कार्य है तो जानकारे का जनता क्या करे---हां भ्रम व भय अवश्य फ़ैल सकता है ....
४-नया नज़रिया ----
--(अ) शैतान बच्चा या अगला सचिन.... वाह क्या नज़रिया है सभी बच्चे पढाई-लिखाई छोडकर खेलने में लग जायें और बच्चों में...अकर्म, अनास्था, टूटने दो कोई बात नहीं, सचिन बनना है...अर्थात गलतियों का नियमितीकरण की भावना उत्पन्न करता है।
---(ब).. मिस इन्डिया २०१५....वाह क्या नया नज़रिया है...सब लडकियों को बस मिस इन्डिआ बनने के प्रयत्नों में लग जाना चाहिये, न कि महा देवी वर्मा, इन्दिरा गान्धी, सीता, मदालसा, किरन बेदी अदि.....

४-इन पर भी नज़र डालिये ---
-----मस्त केटरीना कैफ़.....
-----पूनम अवस्थी कपडे उतारने को तैयार....
-----नायर अब भी दिल के करीब --हर्ले.....
-----छ: करोड की डायमन्ड बस्टर...चोली...
-----बर्लुस्कोनी( इटली के पी एम ) को सेक्स के बदले पैसा देने की क्या जरूरत-- रूसी महिला मित्र......अखिर इन व्यर्थ के समाचारों का क्या महत्व है?...उत्तेजना, भ्रम, असान्स्क्रितिकता  फ़ैलाना...
५-  कुछ अन्य व्यर्थ के समाचार... जो व्यर्थ के पेज बढाकर अखबार का मूल्य व जनता का पैसा व समय बर्बाद करते हैं, जिसकी भरपाई के लिये वही...भ्रष्टाचार का छोटा सा रूप.....
 ---सऊदी अरब में बनेगी सबसे ऊंची इमारत---तो हम क्या करें, जब बनेगी देखा जायगा...
----आज का भविष्य---क्या अन्धविश्वास फ़ैलाना लक्ष्य है...
----सुडोकू..व्यर्थ के लतीफ़े अदि......क्या कोई औचित्य है ...?
---चेर्नोबल सन्कट में जापान...सामान्य जन क्या करे ...जब सरकारी स्तर पर कुछ होगा देखा जायगा...
---उपवास  से कमजोर होता है शरीर----कौन कब से नहीं जानता.....क्या आवश्यकता है इस समाचार की..

 --------और क्या कहाजाय आप तो सभी प्रतिदिन ही झेलते हैं...या सिर्फ़ हेडिन्ग पढकर कुड कुडाते हुए अपने काम में लग जाते हैं.....

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के कारण..मीडिया --..२ -हिन्दुस्तान-स.पत्र का नया आकार...डा श्याम गुप्त.....

.                                                                                         ...कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...   
               जैसा कि घोषित था हिन्दी -हिन्दुस्तान का नया अंक १५/४/११ आया -- और जैसा कि हमने कहा कि क्या नया होगा ..वही ढाक के तीन पात...कुछ बानगी देखिये...
१.... देखिये एक  बयान....जिन्हें महान कवयत्री  महादेवी वर्मा व एक पान वाले के विचारों में कोई अन्तर नही लगता.....जो  महादेवी वर्मा व एक पान वाले के विचारों को एक ही स्तर पर रखते  हों उनका ..वैचारिक स्तर आपही तय करिये और उनसे हम क्या आशा करें........ देखिये चित्र एक-->
 
२- देखिये चित्र दो.. बायें...   क्या नया अवतार भी पहले की ही भांति सेक्सी विग्यापन से युक्त रहेगा , तो नया क्या है.... क्या यह कदाचरण, अनाचरण नहीं है.....
३- देखिये चित्र तीन---दायें--क्या  अमरीकी मारियो से इसलिये नया डिजायन कराया था कि यह बताया जासके कि गान्धीजी के आन्दोलन का मूल विचार  उनका अपना नहीं अपितु एक अमेरिकी नागरिक के विचार से प्रेरित था, और बचपन में वे बहुत डरपोक थे । अर्थात हम अमेरिका के बिना कुछ भी नहीं कर सकते............. सामने चित्र तीन दायें --->
 ४- देखिये चित्र ४-नीचे....  ये लन्दन के भिखारी का गुण गान है या रवीन्द्रनाथ टेगोर का ..?
-----क्या कहना चाहते हैं समाचार पत्र वाले.... यदि अमरीका से बुलाकर डिज़ायन करायेंगे तो अमरीका/ योरोप के गुण गान व उनकी सन्स्क्रिति गान तो होंगे ही....और अपने लोगों के करे कराये पर धूल....अपने हिन्दुस्तानी अखबार -वालों की फ़ौज़ को शर्म से डूब जाना चाहिये....
-----अधिक क्या कहा जाय ...सब जानते हैं...क्या यह भ्रष्ट आचरण, अनाचरण, कदाचरण  के  वाहक नहीं  हैं......

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के कारण....१-हिन्दुस्तान-स.पत्र का नया आकार व मारियो...डा श्याम गुप्त.....

                                                          ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...  
           भ्रष्टाचार सदैव  ही प्रत्येक वस्तु, भाव, विचार , कर्म की अति से प्रारम्भ होता है । यहां समाज में उपस्थित विभिन्न कारणों पर धारावाहिक पोस्टों में प्रकाश डाला जायगा...

भ्रष्टाचार की कारण एक---मीडिया ---  दि ११/४/११ के दैनिक हिन्दुस्तान में बडे जोर शोर से घोषणा की जारही है कि कल से हिन्दुस्तान एक नए रूप आकार में आ रहा है | इस के लिए किसी विदेशी  मारियो, के बड़े गुणगान किये जारहे हैं | मारियो की देख रेख में लग भग दस भारतीय एक दल बना कर सिर्फ हिन्दुस्तान समाचार पत्र को एक नया आकार देंगे |
          अर्थात सिर्फ एक पत्र को नया रूप देने को भी एक विदेशी पर निर्भरता , जिसे मोटी राशि तो देनी ही होगी , अन्य १० लोग भी सिर्फ इस व्यर्थ से कार्य के लिए | वे भी मुफ्त तो कार्य नहीं करते होगे ? और क्या भारतीय पत्रकार, सम्पादक, तकनीशियन इतने गए गुजरे है कि एक नया आकार नहीं दे सकते अखबार को |
           क्या इस नए रूप देने से क्या नई नई खबरें आने लगेंगीं समाचार पत्र में , या खबरों का विषय बदलाजायागा, या बुरी-बुरी , रोजमर्रा की आतंक, चोरी, लूट, बलात्कार , बहू जलाना आदि ख़बरें बंद हो  जाएँगी ?  आखिर सिर्फ खबरें देने वाले समाचार पत्र के नए-आकार रूप की आवश्यकता ही क्या है  सिर्फ अन्य पत्रों की तुलना में हमारा अच्छे आकार वाला है.....यह निश्चय ही दृश्य मीडिया की भाँति रेटिंग का ही चक्कर है | और परिणाम---- खर्चे बढ़ेंगे ,कीमतों में वृद्धि , फिर अन्य पत्र भी आगे आने को वही कार्य करेंगे ...और भ्रष्टाचार की एक लम्बी श्रृंखला का गठन.....|  
  क्या करना चाहिए ---
१- समाचार पत्रों को--- व्यर्थ के आकार -प्रकार सुन्दरता की बजाय साधारण पत्र निकालने चाहिए ताकि कीमत कम रहे , पत्र में व्यर्थ के हीरो-हीरोइनों के गोसिप -कालम, चित्र कालम, सिनेमा की तारीफें बंद कर देनी चाहिए ,  सेक्स से सम्बंधित, मीठी-मीठी बातें, काल गर्लों के प्रचार , खिलाड़ियों के बड़े बड़े अनावश्यक चित्र , कहानियां , प्रेम, विवाह घरेलू समाचार बंद करदेने चाहिए |----पत्र के पेज कम होने से मूल्य स्वतः कम होगा, पत्र के  खर्चे कम होंगें |
२- टी वी  अर्थात दृश्य मीडिया को भी --खिलाड़ियों के, हीरो-हीरोइनों के,  व्यर्थ के इंटरव्यू, व्यर्थ के नाच-गानों , उछल कूद, भोंडे हास्य , फोर्थ अम्पायर , अदालत, विदेशी खेल आदि के सारे प्रोग्राम बंद कर देने चाहिए सिर्फ महत्वपूर्ण मैचों का ही प्रसारण हो... --जिससे जाने कितनी विदेशी मुद्रा की बचत होगी , संस्कृति -प्रदूषण कम होगा और इन व्यर्थ के प्रोग्रामों के लिए, आसानी से मोटी कमाई के लिए  मची आपाधापी, netaage स्टेज पर आने के लिए असंगत उपाय, रिश्वत खोरी, जिस्म फरोशी  अदि भ्रष्टाचार के मूल कारण कम होंगे |
३- हमें ---  किसी भी ऐसे प्रोग्रामों को न देखें , न अन्य को प्रेरणा दें,...   पत्रों , टीवी, केबुल, इंटरनेट आदि पर व्यर्थ के प्रोग्रामों ,अनाचार के फैलाने वाले प्रोग्रामों , समाचारों, चित्रों  का विरोध करें |

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

अन्ना हज़ारे, जन समर्थन , जन क्रान्ति व विचार क्रान्ति-----डा श्याम गुप्त ..

                                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
          एक होती है "जन क्रान्ति " जो अन्ना हजारे द्वारा की जारही है, जो महात्मा गांधी द्वारा की गयी | जिसमें जन जन, बिना अधिक सोचे हुए, विना तर्क-वितर्क के  जन-नेता के पीछे चलता है | यह सामयिक रूप से  किसी लक्ष्य  व विचार की प्राप्ति का शीघ्र -उपाय होता है, जो उचित ही है और लक्ष्य को तेजी से पाने में समाज को सक्षम करता है | जन क्रान्ति जो मूलतः राजनैतिक या किसी विशेष लक्ष्य के लिए होती है जिसमें  में सम्मिलित जन जन की विभिन्न अपेक्षाएं, इच्छाएं रहती हैं | इसमें चमक, नेतागीरी, प्रसिद्धि व प्रशंसा का भाव भी रहता है | जन क्रान्ति मूलतः दूसरे के विरुद्ध होती है, किसी विशिष्ट के विरुद्ध होती है, अतःजन जन का समर्थन शीघ्र उपलब्ध होता है | 
          परन्तु यदि  जन क्रान्ति के साथ , प्रतिक्रान्ति, वास्तविक क्रान्ति " विचार क्रान्ति " न हो तो वह क्रान्ति अधूरी ही रहती है | जैसा भारतीय स्वतंत्रता-क्रान्ति के साथ हुआ कि राजनैतिक सफलता व लक्ष्य प्राप्ति के पश्चात एक विचार क्रान्ति के लिए जन मानस को तैयार करने का कोइ ठोस कार्य नहीं किया गया | यह विज्ञ-जन, बुद्धिवादी लोगों , साहित्यकारों , विद्वानों का दायित्व होता है | परन्तु समस्त जन -जन व विज्ञ-जन भी,  स्वतन्त्रता के भोग, उपभोग में लिप्त होगये जिसका परिणाम आज समाज के हर क्षेत्र व जन जन में उपस्थित भ्रष्टाचार, अनाचार , सांस्कृतिक प्रदूषण जनित अकर्म-अनाचरण -दुराचरण व अप संस्कृति का मूल कारण है | विचार क्रान्ति चुपचाप, प्रसिद्धि से दूर व चमक रहित होती है , अतः कठिन होती है और जन-समूह का जन जन का सहयोग मिलना दुष्कर होता है , क्योंकि यह स्वयं अपने ही विरुद्ध होती है एवं  लक्ष्य दीर्घ कालीन व जन जन के, सामान्य जन के आचरण के विरुद्ध होती है |
            अतः आज भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना के जन समर्थन व सफलता से हमें अति-उत्साहित होकर -कि 'अब तो किला फतह कर लिया ' -सोचकर ,मस्त नहीं होजाना चाहिए | प्राय: सामान्य जन अपने अपने त्वरित व क्षेत्रीय लाभ के लिए भी जन नेताओं के पीछे लाम बंद होजाता  है , लक्ष्य प्राप्त होते ही अपने स्व-स्वार्थ कर्म में लिप्त हो जाता है |  
            हाँ इस प्रकरण से यह तथ्य तो सिद्ध होता ही है कि गांधी आज भी प्रासंगिक हैं | सामान्य जन में सदैव ही इच्छा तो होती है पर विचार व दिशा नहीं और सदा ही विज्ञ जनों , उच्च- पदस्थ जनों व, विद्वानों का यह दायित्व होता है कि उन्हें समय समय पर उचित ज्ञान व मार्ग निर्देशन कराते रहें |
           अतः निश्चय ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक विचार क्रान्ति  का उद्घोष होना चाहिए , जो स्व-भाव,  स्व-भाषा, स्व- देश-राष्ट्र व स्व-संस्कृति के प्रति श्रृद्धा व स्वानुशासन से होना चाहिए | यह आज बुद्धिवादी लोगों का दायित्व है कि  जन जन स्वानुशासन द्वारा स्वयं को भ्रष्टाचार , अनाचरण व सांस्कृतिक प्रदूषण से मुक्त करे |  अन्यथा यह जन क्रान्ति अधूरी व अर्थहीन होगी |

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

वेदिक साहित्य में विग्यान के तथ्य...२....डा श्याम गुप्त...

.                                                                             ...कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 
               वैदिक  साहित्य में आधुनिक विज्ञान के बहुत से तथ्य सूत्र रूप में मौजूद हैं ,  कुछ अन्य तथ्यों को यहाँ रखा जारहा है.....

प्रकाश के सात रन्ग.....ऋग्वेद  १/४/५२५---  में सूर्य की उपासना करते हुए ऋषि कहता है.....
           "सप्त त्वा हरितो रथो वहन्ति देव सूर्यः | शोचिष्केशं विचक्षण: ||"   ----हे सर्व दृष्टा सूर्यदेव ! आप तेजस्वी ज्वालाओं से युक्त दिव्यता धारण करते हुए सप्तवर्णी किरणों रूपी अश्वों के रथ पर सुशोभित होते हैं |
ऊर्ज़ा के रूप व उपयोगों का वर्णन-----   ऋग्वेद 1/66/723  के अनुसार -----
"य ई चिकेत गुहा भवन्तमा य: ससाद धाराम्रतस्य।वि ये च्रितन्त्र्प्रत्या सपन्त आदिद्वसूनि प्र ववाचास्मै ॥"
          -----जो गुह्य अग्निदेव को जानते हैं, यग्य में उन्हें प्रज्वलित करते हैं, और धारण की स्तुति करते हैं, वे अपार धन प्राप्त करते हैं ।----अर्थात.. जो विभिन्न पदार्थों में निहित --रसायन, काष्ठ, कोयला, जल, अणु आदि में अन्तर्निहित छुपी हुई अग्नि= शक्ति= ऊर्ज़ा को जानकर , उनसे ऊर्ज़ा-शक्ति प्राप्त करके उपयोग में लाते हैं वे  वे व्यक्ति, समाज, देश सम्पन्नता प्राप्त करते हैं। केमीकल, एटोमिक, हाइड्रो-, स्टीम, काष्ठ स्थित मूल अग्नि ऊर्ज़ा आदि का वर्णन है ।         
अग्नि की खोज व उपयोग--- ऋग्वेद 1/127/1432----का कथन है ---
" द्विता यवतिं  कीस्तासो अभिद्य्वो वमस्पन्त । उद वोचतं भ्रिगवो मथ्नन्तो दाश्य भ्रगव ॥"  ----भ्रगु वेष में उत्पन्न रिषियों ने मन्थन द्वारा अग्नि देव को प्रकट किया,  स्त्रोत कर्ता,( पढ्ने-लिखने वाले) स्रजनशील( वैग्यानिक उपयोग कर्ता-खोजकर्ता), विनय शील( समाज व्यक्ति के प्रति उत्तर्दायी)  भ्रगुओं ने प्रार्थनायें कीं ।
शब्द व वाणी अविनाशी- रिग्वेद १/१६४/१२१६--कहता है "तभूवुर्षा सहस्राक्षरा परमे व्योमनि॥" ...अर्थात ..वाणी सहस्र अक्षरों से युक्त होकर व्यापक आकाश , अन्तरिक्ष में संव्याप्त होजाती है ।अर्थात शब्द, वाणी, ( व सभी ऊर्ज़ायें) कभी विनष्ट नहीं होतीं , वे अक्षर हैं, अविनाशी । इसीलिये आज वैग्यानिक गीता के श्लोकों को अनन्त आकाश में से रिकार्ड करने का प्रयत्न कर रहे हैं ।



गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार व अन्ना हज़ारे का अनशन.....

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...       
          ६१ वर्ष में न जाने कितनी सरकारें आईं व गईं ...परन्तु भ्रष्टाचार बढ्ता ही गया व बढ्ता जारहा है...अतः भ्रष्टाचार कोई राजनैतिक मामला नहीं है, अपितु मानवीय आचरण का मामला है। जिस प्रकार से  कान्ग्रेस व मनमोहन सिन्ह सरकार पर आक्षेप लगाये जारहे हैं ( क्योंकि संयोग से इस सरकार के विरुद्ध ही तमाम मामले उजागर हुए हैं एवं  अधिकान्श समय कान्ग्रेस सरकार ही सत्ता में रही है, इससे क्या अन्य सरकारें क्या कर रहीं थीं ), एवं लोकपाल को सर्व-समर्थ बनाने की बात की जारही है, इससे लगता है कि इसे एक राजनैतिक मामला माना जा रहा है । क्या गारन्टी है कि लोकपाल स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हो जायगा । क्या आज कोई एसा व्यक्ति है सरकार, शासन, प्रशासन,जनता कहीं भी जिसे माना जाय कि वह भ्रष्ट नहीं हो जायगा।....साफ़-सुथरे पूर्व राष्ट्रपति कलाम/ प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी-- क्यों नहीं इस मसले पर आगे आये ? 
         यद्यपि पहल को अच्छा ही कहा जायगा, कहीं से  तो  पहल हो । हां जब तक राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ ,आमूल चूल रूप में  मानवीय आचरण सुधारने के , सांस्कृतिक सुधार के, स्वयं जन जन स्वयं को सुधारने के  उपाय नहीं किये जाते ..भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता |