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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

पर उपदेश कुशल बहुतेरे ....अमरीका और बलात्कार ..डा श्याम गुप्त ..

                                     
                                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



             अभी हाल में ही भारत में 23 वर्षीय महिला के बलात्कार की घटना के सन्दर्भ में (भारतीय जनता को तो करना ही चाहिए था ..उचित ही था )  अमेरिकनों  व अमेरिकन -मीडिया के साथ-साथ ही विश्व के विभिन्न देशों व अमेरिका में बसे एवं भारत में स्थित अमेरिकन परस्त भारतीयों द्वारा भी  विभिन्न ब्लोगों, आलेखों पर टिप्पणियों के रूप में बड़े जोर-शोर से घटना का प्रस्तुतीकरण एवं  भारत सरकार व भारतीय समाज,सभ्यता, संस्कृति  आदि की बुराई -खिंचाई की गयी |.....कहा गया कि अमेरिका में होता तो ऐसा नहीं होता .....|
               
                          परन्तु वहीं अमेरिका की दो रेप घटनाओं को देखिये ..जिनके बारे में अधिक चर्चा नहीं की गयी, और अमेरिकन मीडिया अपनी स्वयं की रेप-कल्चर की असली तस्बीर  दिखाने में पीछे रहा |-

------ न्यूयॉर्क टाइम्स के समाचार अनुसार  अगस्त २०१२ को ओहियो में एक १६ वर्ष की महिला का बलात्कार किया गया एवं उसके बेहोश शरीर के ऊपर मूत्र-विसर्जन किया जाता रहा ... हाईस्कूल के बेस-बाल खिलाड़ियों की टीम में इस घटना का भी डिस्कशन भी किया जाता रहा |
-------३ जनवरी को केलीफोर्निया अपील कोर्ट द्वारा एक सोती हुई महिला के बलात्कार को  बलात्कार नहीं माना गया  क्योंकि महिला अविवाहिता थी |
                    अब आप अमेरिकन रेप-स्टेटस देखिये ....
------- अमेरिका में कहीं न कहीं प्रत्येक २ मिनट पर एक महिला के साथ रेप होता है | (U.S. Department of Justice.)
------- लगभग २०% रेप बॉय-फ्रेंड्स व पतियों द्वारा किये जाते हैं ,३५% जान पहचान वालों द्वारा, तथा ५% अन्य सम्बन्धियों द्वारा |
------ कुल बलात्कारों के सिर्फ ३७% ही पुलिस में रिपोर्ट किये जाते हैं |
--- लगभग 81% रेप श्वेत लोगों के एवं 18% ब्लेक लोगों के होते हैं|  निम्न आय वर्ग व उच्च आय वर्ग दोनों में ही ५०-५० %  रेप होते हैं |
--२००७ में सेक्चुअल -असाल्ट के २४८३०० केस एवं रेप के ९१८७४ केस रिकार्ड किये गए| प्रत्येक मर्डर के साथ रेप का अनुपात ५:१  है |
                            एक विवरण के अनुसार ---( European Institute for Crime Prevention and Control International Statistics on Crime and Justice, 2011) विश्व में कुछ मुख्य  देशों की  सेक्स-एसाल्ट रेप-रेंकिंग( १ इन १०००००) इस प्रकार है....


                   total 118.contries------------
Rank       Countries            Amount               Date 
# 1         France:                 10,277       2009 Time series    
# 23         Canada:               491          2009 Time series
# 40         South Africa:     113.5         2002 Time series
# 43         Australia:            91.6          2003 Time series
# 57         United States:     30.2         2006 Time series
100           India:                    1.7       2006 Time series

 १९८७----एक स्टडी के अनुसार---- १५% कालेज -छात्राओं के साथ रेप  एवं १२% छात्राओं  के साथ  रेप जैसी घटनाएँ  स्वीकार की गयीं |

- 2000 में एक स्टडी के अनुसार ( the National Institute of Justice and the Bureau of Justice )----3.1%  अंडर -ग्रेजुएट  महिलायों द्वारा एक एकेडेमिक वर्ष में रेप या अटेम्प्ट रेप की शिकायत की गयी  एवं उच्च शिक्षा के संस्थानों में  महिलाओं पर रेप आदि  की घटनाएँ २५% तक का अनुमान किया गया 

                                  कहने का या आलेख का यह अर्थ नहीं है कि बलात्कार कोई अच्छी बात है और अमेरिका में भी होता है तो हमारे यहाँ होता है तो कोई बात नहीं ...... जो विकृति है वह कितनी भी, कहीं भी हो अनुचित है एवं उसे रोकने के सभी उपाय होने चाहिए .....परन्तु वे पहले अपना घर देखें तब अन्य को उपदेश दें |
                               हमारे अमरीका परस्त भारत वासी ...उसके प्रशंसक, भक्त .....तथा कथित पढ़े-लिखे लोग...युवा ...संस्थाएं अदि भी..... जो तुरंत भारतीय -सरकार, भारतीय व्यवस्था...भारतीय कल्चर के पीछे लट्ठ लेकर पड़ जाते हैं .... गहन विचार करें |  हमें सुधार चाहिए ..न कि नक़ल की संस्कृति अपना कर एवं अपनी सभ्यता-संस्कृति की अनावश्यक बुराई व  आलोचना द्वारा |
                                                                                                    (  --- आंकड़े आदि --गूगल साभार  )

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

भारतीयता व राष्ट्रीयता व असहिष्णुता ....डा श्याम गुप्त ..

                                ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ
                      आजकल राष्ट्रीयता, देशप्रेम, जन से संपृक्तता  व भारतीयता एवं सहिष्णुता  का कितना अभाव होगया है यह हाल की कुछ घटनाओं से  स्पष्ट होजाता है ...
    
१.जयपुर लिट्. फेस्टीवल ....विश्व के १०० प्रसिद्द बुद्दिवादियोंमें  कैसे कैसे  लोग शुमार हैं कि एक छोटे से घटनाक्रम से ही उनकी विद्वता  की कलाई खुलने लगती है....जो भारत के एक साहित्य  फेस्टिवल में वह भी उत्तर भारत के हिन्दी भाषी  नगर में भारतीय जनता के लिए .'आइडियज  ऑफ़ इन्डियन रिपब्लिक ' विषय पर अंग्रेज़ी में भाषण देते हैं ..(यों तो भारतीय गणतंत्र का विषय एवं विषय का शीर्षक ही अंग्रेज़ी में क्यों रखा गया ...) एवं भाषा की अज्ञानता रहते इतने स्पष्ट भाव-शब्द व वाक्य नहीं  बोल सकते कि मीडिया व जनता ठीक से समझे और उन्हें बाद में सफाई न देनी पड़े  और सुप्रीम कोर्ट को फटकारना न पड़े |
                  यह अंग्रेज़ी भाषा की  विद्वता  व हिन्दी- या स्व-भाषा - भावों की समझ का फेर भी हो सकता है | राष्ट्रीयता , भारतीय-सहिष्णुता का अभाव  शब्दों व उनके के प्रभाव के तात्विक-ज्ञान की कमी का भी | इस घटनाक्रम से यह भी पता चलता है   कि हमारे  तथाकथित  'बेस्ट नोन एकेडेमीशीयन ' समाजशास्त्री .... समाज की नब्ज व समाजशास्त्र के बारे में कितना जानते हैं  एवं समाज के बारे में क्या धारणा रखते हैं |


२. विश्वरूपम ...                      ----  ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि, ज्ञान एवं  राष्ट्र-प्रेम को क्या कहा जाय जो एक छोटे से घटनाक्रम से धैर्य खोकर तुरंत देश छोड़ने की धमकी देने लगें ....इन्हें  साहित्यकार व  कलाकार  कहने में भी हमें शर्म आनी चाहिए ये तो शुद्ध  अहंकारी व धन्धेवाज़ हैं | चार फ़िल्में बना लेने वाला कोई भी व्यक्ति या उसका अहं इतना ऊंचा कभी नहीं हो सकता, न होता कि किसी भी एक तबके द्वारा उसके विचारों का  विरोध करने पर वह देश को धमकी देने लगे | देश की सामाजिक व न्याय व्यवस्था पर जिसे धैर्यपूर्ण विश्वास ही न हो उन्हें वास्तव में ही देश छोड़ देना चाहिए | कोई भी अपूरणीय नहीं है इस देश के लिए |

                            घटनाओं का  दूसरा पहलू यह भी है कि----दोनों घटनाओं , घटनाक्रमों एवं जन क्रिया-प्रतिक्रियाओं से  प्रतीत होता है कि हम कितने असहिष्णु होगये हैं | बोलने, लिखने, प्रदर्शित करने  की पूर्ण स्वतन्त्रता होनी ही चाहिए  जब तक कि किसी में   अनर्गल , असभ्य्तापूर्ण, गाली-गलौज़ की भाषा , चरित्र हरण आदि न हो |...यदि किसी को आपत्ति है तो वह उचित स्थान पर दर्ज कराये | क्रिया की प्रतिक्रया ( प्रभावित पक्ष द्वारा) भी असहिष्णुता है | सभी पक्षों द्वारा  असहिष्णुता का परिचय दिया गया|

                             यह असहिष्णुता इस देश में कहाँ से आई ?? जिस देश में व दुनिया भर में हज़ारों रामायण हों, गीता हों ...सबके  अपने-अपने अर्थ हों..सब अपने अपने प्रकार से कहने को स्वतंत्र हो ....किसी में सीता रावण की पुत्री...कहीं प्रेमिका, कहीं राम को नारी विरोधी ..कृष्ण को लम्पट ..सभी को अपनी-तरह से लिखने -कहने काअधिकार हो ....जिस देश में ब्रह्मा-विष्णु-शिव जैसे  जाति -कुल अदि से परे सभी --देव-दानव-दैत्य-राक्षस सभी को एक सामान वरदान देने वाले पात्र रचे गए हों ... कोई ईश्वर को माने  न  माने , सभी धर्मों..जातियों के मिलन का यह देश ...कैसे इतना असहिष्णु होगया.....? विदेशी आक्रमणकारियों ..पहले मुगलों की हिन्दू-मुस्लिम में भेदभाव पूर्ण नीति, तत्पश्चात अंग्रेजों द्वारा भारतीय-अँगरेज़-योरपीय भेद-भाव  नीति द्वारा.....
                      इसका एक ही उत्तर है....स्व-संस्कृति के विस्मरण से | स्वयं के विस्मरण से ....पर- संस्कृति के जाल से .... हमें पुनः स्मरण करना होगा कि-----
        " हम कौन थे क्या होगये और क्या होंगे अभी ,
          सोचें समस्याएँ यही  बैठकर के हम सभी |"""""




शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

श्री लंका यात्रा --अंतिम क़िस्त .....इन्दुर्वा बीच -











                                

इन्दुर्वा बीच रिजोर्ट  एव बीच -हिन्द महासागर  श्री लंका
इन्दुर्वा बीच
दुग्ध-धवल फेनिल सागर जल

                        २९-१२-१२  को प्रातः नाश्ते के उपरांत होटल में ही  स्विमिंग पूल एवं श्री लंका के दक्षिणी -पश्चिमी तट पर हिन्द-महासागर स्थित इन्दुर्वा बीच  जो रिजोर्ट की अपनी  ही बीच है ,पर  समुद्री तट पर घूमने,  समुद्र स्नान ,  चट्टानों से टकराकर उछलते समुद्र की लहरों का आनंद लिया क्योंकि दोपहर  को कोलम्बो के लिए निकलना था जहां से चेन्नई के लिए फ्लाईट थी  एवं चेन्नई से रात्रि में बेंगलोर के लिए ट्रेन  |
आराध्य निर्विकार व रीना सागर-लहरों में
                      









 
     













लहरों की भंवर में
 बालू में रीना व सुषमा जी
धवल लहरों में मस्ती--आराध्य, रीना व निर्विकार


 निर्विकार एवं सागर की  एक उत्ताल तरंग 
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                       
   
सागर तट -चट्टान पर
मछली पकड़ते नाविक
                  



आराध्य, रीना व निर्विकार के साथ मस्ती के मूड में



सुषमा जी की गोद में आराध्य और दोस्ती का हाथ

|दोपहर में हम लोग बापस कोलम्बो के लिए चल दिए रास्ते में  कोस्गोडा टर्टल - हेचरी व नर्सरी में एक दिन से ५५ वर्ष व ८४ वर्ष तक  उम्र के व विभिन्न प्रजातियों के टर्टल ( सागरीय कच्छप ) का अवलोकन किया | यहाँ समुद्र से टर्टल के अंडे रात के समय में बीच की रेती सहित उठालिये जाते हैं एवं २-३ दिन का होने पर पुनः सागर में छोड़ दिए जाते हैं| समुद्री कच्छप -टर्टल -  सामान्य टोरटोइज़---कछुओं --से भिन्न कच्छप की वह प्रजाति होती है जिसके कछुओं की भाँति  पैर न होकर मछली के फिन्स ( परों) की भाँति  चार फ्लेट पैर होते हैं एवं वे कछुओं की भाँति सुरक्षा हेतु अपने खोल ( कवच) में नहीं घुस सकते |
आरू सिपिंग द नारियल-पानी
अल्बीनो -श्वेत -टर्टल
२ दिन के टर्टल-बच्चे  और आराध्य
बड़े टर्टल
                  



                      २९-१२-१२ शाम को कोलम्बो के भंडारनायके एयर -पोर्ट पर पहुँच कर  एक सप्ताह तक साथ रहने वाले  सौम्य व सज्जन व्यक्तित्व वाले श्री लंकन ड्राइवर  व गाइड  का किरदार निभाने वाले श्री हरेंदु मेंडिस  से बिदा ली | मेरी  पुस्तक  शूर्पणखा काव्य-उपन्यास की प्रति भेंट में पाकर उन्होंने हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की | ३०-१२-१२ को प्रातः हम लोग बापस बेंगलोर आगये   |             

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

श्री लंका यात्रा भाग आठ ....बेन्टोटा नदी में ,,,,




                      बेंटोटा गंगा नदी में बोटिंग एवं वाटर स्पोर्ट्स --- 28-12-12  -प्रातः नाश्ते के पश्चात हम लोगों ने इन्दुर्वा से बेन्टोटा नदी के लिए प्रस्थान किया |  नदी जहां समुद्र में मिलती है काफी बड़ा व घना डेल्टा बनाती  है जिसमें बने  मेंग्रोव के घने दलदलीय वनों में होकर बहती है जिनमें घड़ियाल, मगरमच्छ व वाटर-मोंस्टर  नामक जल-जंतु पाए जाते हैं | पहले विशाल नदी एवं मेंग्रोव वनों में बोटिंग की गयी तत्पश्चात निर्विकार -रीना  समुद्र में स्नोर्क्लिंग व स्कूबा डाईबिंग  करना चाहते थे परन्तु मौसम व समुद्र की हलचल उपयुक्त न  होने के कारण वापस लौट आये एवं सभी ने नदी में ही अन्य वाटर-स्पोर्ट्स का आनंद लिया |

डाइनिंग हाल में  मस्ती करते  हुए आराध्य

इन्दुर्वा बीच रिजोर्ट में ब्रेक-फास्ट

बेन्टोटा  -पुल पर श्री लंकन ट्रेन

क्रोकोडायल का शिशु

वाटर -मोंस्टर स्थल पर



 नदी से मस्जिद का दृश्य
नदी में आईलेंड पर मगरमच्छ विश्राम करते हुए व मेंग्रोव के घने वन

नदी में  तैरते हुए वाटर मोंस्टर



विशालकाय बेंटोटा -गंगा नदी में बोटिंग




मेंग्रोव के घने वन में

                                   
मेंग्रोव के घने वन में जाती हुई नावें
वाटर स्पोर्ट-सुषमा जी व आराध्य के साथ
रीना व निर्विकार वाटर स्कूटर पर

आराध्य की जलक्रीडा

सुषमा जी , रीना, निर्विकार व आराध्य वाटर स्कूटर पर
निर्विकार के साथ वाटर स्कूटर पर
                         नदी  व सागर में वाटर स्पोर्ट कराने वाले अधिकांस लोग  श्रीलंका के आदिवासी  वेददा -यक्का क्लान  ( प्राचीन यक्ष-राक्षस-नाग )   के  लोग हैं जो  वहां के मूल निवासी हैं -गहन वन के निवासी -हंटर-गेदरर  मानव --जो आधुनिक समय में  नगर में बस गए हैं एवं कुशल तैराक व समुद्री जोखिम में माहिर हैं |

 वाटर स्पोर्ट  कराने वाले कुशल नाविक


                 

बुधवार, 30 जनवरी 2013

श्रीलंका यात्रावृत्त -भाग सात--पिन्नावाला एलीफेंट नर्सरी.....






                                     ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...




बोल्डर रेंज रिसोर्ट

दम्बूला फारेस्ट बोल्डर रेंज रिजोर्ट में रूम के बाहर आम के बाग़में निर्विकार व रीना 


बोल्डर रेंज रिजोर्ट में आराम
दम्बूला गहन वन में रिजोर्ट

महावेली गंगा

                        बोल्डर रेंज फरेस्ट रिजोर्ट में २६-१२-१२ को रात्रि विश्राम के पश्चात्  प्रातः २७-१२-१२ को हमारा कारवां अपनी  अंतिम मंजिल बेन्टोटा के लिए चल दिया  |  पोलोनारूवा के नज़दीक कुछ किलोमीटर दूर से  श्रीलंका की सबसे बड़ी नदी एवं द्वीप की लाइफ-लाइन महावेली गंगा गुजरती है जो केंडी के समीप हाटन पठार के पहाडी-वनों से निकलकर  मुख्य सह-नदी अब्बन गंगा से मिलकर विशाल जल-भाग विक्टोरिया रिज़र्वोयर  एवं रंदेविशाला रिज़र्वोयर बनाती हुई वासागामुवा नॅशनल पार्क  व पोलोनारूवा के समीप  से गुजरती  हुई ३३५ कि मी चलकर त्रिंकोमाली के समीप कोदियार बे  में बंगाल की खाडी - हिंदमहासागर में  गिरती है| वास्तव में यहाँ सभी बड़ी नदियों को गंगा कहा जता है यथा..कालू-गंगा, अब्बन गंगा, बेन्टोटा  गंगा आदि.... रास्ते में पिन्नावाला में हाथियों का विश्व-प्रसिद्द नर्सरी का भी भ्रमण  किया गया|
               पिन्नावाला एलीफेंट ओर्फनेज --- हाथियों की  नर्सरी व रिज़र्व है जो विश्व में सबसे बड़ा  हाथियों का रिज़र्व है जिसे श्रीलंका के जंगलों में असहाय घूमते हुए जंगली हाथियों के पालन-पोषण के लिए स्थापित किया गया था| यह केंडी व कोलम्बो के मध्य स्थित है | यह अपने मुख्य आकर्षण हाथियों के  महा ओया नदी में नहाने और खेलने के दृश्यों के लिए टूरिस्ट्स में काफी प्रसिद्द है| यहाँ लगभग ८८ हाथी हैं---३७ नर व ५१ मादा हैं जो लगभग तीन पीढ़ियों से पिन्नावाला में हैं|  नदी के रास्ते में बाज़ार में आप विभिन्न प्रकार के मेग्नेट-स्टीकर , चमड़े व वस्त्रों के सामान आदि खरीद अकते हैं|
पिन्नावाला बाज़ार में निर्विकार व आराध्य
हाथियों का स्नान देखते हुए रीना जी, आराध्य व सुषमा जी
महा ओया नदी की राह पर
महाओया नदी में हाथियों का स्नान
                      















                   
रास्ते में खेतों का विहंगम दृश्य

रास्ते में कालू रिवर  में हाथी नहाते हुए


                  












धारगा गाँव में दरगाह
एक्सप्रेस वे
               पिन्नावाला से केगले, अविस्सावाला होते हुए होमागामा से  बिलकुल एडवांस योरोपीय देशों की भाँति बना हुआ  शानदार 'साउथ एक्सप्रेस  वे ' --जिसमें हर पग डंडी, गाँव, शहर  के नज़दीक सड़क पार करने के लिए उपरिगामी पुल बना हुआ है ताकि किसी को भी हाइवे पर कभी न  आना पड़े एवं तीब्र गामी वाहनों को बाधा न  हो -- पर होते हुए अलुथगामा पर हाइवे से अलुथागामा रोड , व मुस्लिम बहुल धारगा गाँव ( दरगाह गाँव -- यहाँ प्रसिद्द मुस्लिम दरगाह है ) होते हुए २७-१२-१२  शाम को बेन्टोटा नदी के समुद्र में मिलने  के स्थान -डेल्टा पर बसे  बेन्टोटा नगर में हिन्द महासागर के तट स्थित  इन्दुर्वा  र्बीच रिजोर्ट पहुंचे |
इन्दुर्वा बीच रिजोर्ट
आराध्य बालकनी से समुद्र देखते हुए