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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास ---भाग चार----वानर साम्राज्य , माया सभ्यता, दक्षिणी अमेरिका-चिली , पेरू, वियतनाम, इस्लामी देश ----डा श्याम गुप्त

....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----




भाग चार----वानर साम्राज्य , माया सभ्यता, दक्षिणी अमेरिका-चिली , पेरू, वियतनाम, इस्लामी देश --
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 १.बानर सामराज्य--होंडूरास --द.अमेरिका

२. नाजका रेखाए---पेरू ---शिव का त्रिशूल- Nazca Lines in. 
 ३.वियतनाम में शिवलिंग 

४.अफगान शासक की विष्णु पूजा  
                
  
५.अफगा निस्तान से शिव मूर्ति


६.ये हंसवाहिनी सरस्वती माँ की मूर्त्ति है जो अभी लंदन संग्रहालय में है.यह सऊदी अर्बस्थान से ही प्राप्त हुआ था

७.अष्टधातु से बना दिया ये दीप अरब से प्राप्त हुआ है जो इस्लाम-पूर्व है.इसी तरह का दीप काबा के अंदर भी अखण्ड दीप्तमान रहता है .


८.मक्का स्थित शिवलिंग ---

 ९. शिव लिंग का भाग –काला पत्थर जिसे चूमा जाता था              


---- १०.विक्रमादित्य के काल बने में काले ग्रेनाईट के अंतरिक्ष गिरे टुकडे का शिव लिंग ७००० बी सी जो    काबा  के शिव मंदिर का का मूल शिव लिंग था |


                                        ११.-----६००० वर्ष प्राचीन राम व हनुमान का चित्र ----ईराक 

८.वानर साम्राज्य का रहस्य : वानर का शाब्दिक अर्थ होता है 'वन में रहने वाला नर।' वन में ऐसे भी नर रहते थे जिनको पूछ निकली हुई थी।
------शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से 12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का नाम कपि था। हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था....कापी –विशालकाय वानरों की प्रजाति ..
-----यह मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है।
--भारत के बाहर वानर साम्राज्य --- सेंट्रल अमेरिका के मोस्कुइटीए (Mosquitia) में शोधकर्ता चार्ल्स लिन्द्बेर्ग ने एक ऐसी जगह की खोज की है जिसका नाम उन्होंने ला स्यूदाद ब्लैंका (La Ciudad Blanca) दिया है जिसका स्पेनिश में मतलब व्हाइट सिटी (The White City) होता है, जहां के स्थानीय लोग बंदरों की मूर्तियों की पूजा करते हैं। कि यह वही खो चुकी जगह है जहां कभी हनुमान का साम्राज्य हुआ करता था।
------एक अमेरिकन एडवेंचरर ने लिम्बर्ग की खोज के आधार पर गुम हो चुके Lost City Of Monkey God’ की तलाश की
 
                          चित्र१.     बानर सामराज्य--होंडूरास --द.अमेरिका ..
----अमेरिका की प्राचीन माया सभ्यता ---ग्वाटेमाला, मैक्सिको, पेरू, होंडुरास तथा यूकाटन प्रायद्वीप में स्थापित थी। यह एक कृषि पर आधारित सभ्यता थी। 250 ईस्वी से 900 ईस्वी के बीच माया सभ्यता अपने चरम पर थी। इस सभ्यता में खगोल शास्त्र, गणित और कालचक्र को काफी महत्व दिया जाता था। मैक्सिको इस सभ्यता का गढ़ था। आज भी यहां इस सभ्यता के अनुयायी रहते हैं। यह मय दानव द्वारा बसाई हुई सभ्यता ही थी

-------अमेरिकन इतिहासकार मानते हैं‍ कि भारतीय आर्यों ने ही अमेरिका महाद्वीप पर सबसे पहले बस्तियां बनाई थीं। अमेरिका के रेड इंडियन वहां के आदि निवासी माने जाते हैं और हिन्दू संस्कृति वहां पर आज से हजारों साल पहले पहुंच गई थी। माना जाता है कि यह बसाहट महाभारतकाल में हुई थी।
९.चिली, पेरू और बोलीविया में हिन्दू धर्म : अमेरिकन महाद्वीप के बोलीविया (वर्तमान में पेरू और चिली) में हिन्दुओं ने प्राचीनकाल में अपनी बस्तियां बनाईं और कृषि का भी विकास किया। यहां के प्राचीन मंदिरों के द्वार पर विरोचन, सूर्य द्वार, चन्द्र द्वार, नाग आदि सब कुछ हिन्दू धर्म समान हैं।
दक्षिण अमेरिका ---Peru
   चित्र२.नाजका रेखाए---पेरू ---शिव का त्रिशूल Nazca Lines in. http://www.unmuseum.org/nazca.htm
----सुग्रीव, रामायण में अपनी सेना को सीताजी की खोज के लिए उस क्षेत्र की खोज के लिए कहता है जहां शिव का त्रिशूल पाया गया  है |

१०.वियतनाम : पुराना चम्पा था। चम्पा के लोग और चाम कहलाते थे और उनके राजा शैव थे। दूसरी शताब्दी में स्थापित चंपा भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। यहां के चम लोगों ने भारतीय धर्म, भाषा, सभ्यता ग्रहण की थी। 1825 में चंपा के महान हिन्दू राज्य का अंत हुआ।
------वर्तमान समय में चाम लोग वियतनाम और कम्बोडिया के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं। आरम्भ में चम्पा के लोग और राजा शैव थे लेकिन कुछ सौ साल पहले इस्लाम यहां फैलना शुरु हुआ। अब अधिक चाम लोग
मुसलमान हैं पर हिन्दू और बौद्ध चाम भी हैं।
==चित्र  ३.यतनाम में शिवलिंग

 ११.इस्लाम - हिन्दू धर्म का विरूपण ---आज जिसे काबाकहते है, वह वस्तुतः काव्य शुक्र’ (शुक्राचार्य) के सम्मान में निर्मित उनके आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है। अरबी भाषा में शुक्रका अर्थ बड़ाअर्थात जुम्मा इसी कारण किया गया और इसी सेजुम्मा’ (शुक्रवार) को मुसलमान पवित्र दिन मानते है।
---अरब   शिव व पार्वती स्थान का इलावर्त राज्य का –स्त्री राज्य था जो वृहस्पति पत्नी तारा व चन्द्र के पुत्र बुध पुत्र महाराज इल का राज्य था , इल से  इल इलाह --- अल्लाह ... |
                
चित्र-४  शासक की विष्णु पूजा                 चित्र ५. अफगानिस्तान से शिव मूर्ति

चित्र-६.------ये हंसवाहिनी सरस्वती माँ की मूर्त्ति है जो अभी लंदन संग्रहालय में है.यह सऊदी अर्बस्थान से ही प्राप्त हुआ था..  चित्र-७.अष्टधातु से बना दिया ये दीप अरब से प्राप्त हुआ है जो इस्लाम-पूर्व है.इसी तरह का दीप काबा के अंदर भी अखण्ड दीप्तमान रहता है .

 चित्र८.मक्का स्थित शिवलिंग ---              चित्र ९. शिव लिंग का भाग –काला पत्थर जिसे चूमा जाता था

चित्र-१०.---- विक्रमादित्य के काल बने में काले ग्रेनाईट के अंतरिक्ष गिरे टुकडे का शिव लिंग ७००० बी सी जो    काबा  के शिव मंदिर का का मूल शिव लिंग था |
                                                                  

 चित्र ११.-----६००० वर्ष प्राचीन राम व हनुमान का चित्र ----ईराक




-----क्रमश भाग पांच----- योरोप ...

 

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----डा श्याम गुप्त

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 
हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----

१.--मिस्र में ६००० वर्ष पुराना शिवलिंग




२.अफ्रीका-६००० वर्ष –शिव लिंग
४.  --फराहो—मिस्र –नंदी की पूजा 
५. चीन में हिन्दू मंदिर के खंडहर

६.शिव पार्वती , चीनी बौने के साथ एवं चीनी ड्रेगन –बादामी, कर्नाटक भारत

७. हिन्दू मंदिर अज़र्बेजान            

८. माता का त्रिशूल ..अज़र्बेजान मंदिर
९. आयरलेंड में  तारा पर्वत पर ---शिवलिंग पूजा
१० स्वास्तिक –बुल्गारिया में 
११.  यह विष्णु मूर्ति पाई गई। वर्षों से उत्खनन कर रहे समूह के डॉ. कोजविनका कहना है कि मूर्ति के साथ ही अब तक किए गए उत्खनन में उन्हें प्राचीन सिक्केपदकअंगूठियां और शस्त्र भी मिले हैं।
 १२.देवताओं का किला ----तुर्कमेनिस्तान 
 १३.हरप्पा टाइप सील---रूस 


१४.मंगोलिया में , सिवा नखलिस्तान में नमक पीसती हुई लड़की ,चाकी से ---जो भारतीय विशेषता है







५.अफ्रीकी में हिन्दू -- साउथ अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि आज से 6 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीकी लोग भी हिंदू धर्म का पालन करते थे।
-------साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नामक एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव की 6 हजार वर्ष पुरानी शिवलिंग की मूर्ति मिली जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता हैरान हैं कि यह शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रहा।
                                   
                               


                   



६.चीन में हिन्दू : चीन के इतिहासकारों के अनुसार चीन के समुद्र से लगे औद्योगिक शहर च्वानजो में और उसके चारों ओर का क्षे‍त्र कभी हिन्दुओं का तीर्थस्थल था। वहां 1,000 वर्ष पूर्व के निर्मित हिन्दू मंदिरों के खंडहर पाए गए हैं। इसका सबूत चीन के समुद्री संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां हैं।
वर्तमान में चीन में कोई हिन्दू मंदिर तो नहीं है, लेकिन 1,000 वर्ष पहले सुंग राजवंश के दौरान दक्षिण चीन के फुच्यान प्रांत में इस तरह के मंदिर थे लेकिन अब सिर्फ खंडहर बचे हैं।

७.यजीदी हिन्दू है? यजीदी धर्म भी विश्व की प्राचीनतम धार्मिक परंपराओं में से एक है। इस कुछ इतिहासकार हिन्दू धर्म का ही एक समाज मानते हैं। यजीदियों की गणना के अनुसार अरब में यह परंपरा 6,763 वर्ष पुरानी है अर्थात ईसा के 4,748 वर्ष पूर्व यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों से पहले से यह परंपरा चली आ रही है। यजीदियों की कई मान्यताएं हिन्दू और ईसाइयत से भी मिलती-जुलती हैं। ईसाइयत के आरंभिक दिनों में मयूर पक्षी को अमरत्व का प्रतीक माना जाता था। बाद में इसे हटा दिया गया।
----हिन्दुओं की तरह ही यजीदियों में जल का महत्व है। धार्मिक परंपराओं में जल से अभिषेक किए जाने की परंपरा है। तिलक लगाते हैं और अपने मंदिर में दीपक जलाते हैं। हिन्दू देतता कार्तिकेय जैसे दिखाई देने वाले देवता की पूजा करते हैं। उनके मंदिर और हिन्दुओं के मंदिर समान नजर आते हैं। पुनर्जन्म को मानते हैं। यजीदी अपने ईश्‍वर की 5 समय प्रार्थना करते हैं। सूर्योदय व सूर्यास्त में सूर्य की ओर मुंह करके प्रार्थना की जाती है। स्वर्ग-नरक की मान्यता भी है। धार्मिक संस्कार कराने वाले विशेषज्ञों की परंपरा है। व्रत, मेले, उत्सव की परंपरा भी है। समाधियां व पूजागृह (मंदिर) भी हैं।



 ७.रूस में हिन्दू : एक हजार वर्ष पहले रूस ने ईसाई धर्म स्वीकार किया। इससे पहले यहां वैदिक पद्धति के आधार पर हिन्दू धर्म प्रचलित था।
-----रूस में आज भी पुरातत्ववेताओं को कभी-कभी खुदाई करते हुए प्राचीन रूसी देवी-देवताओं की लकड़ी या पत्थर की बनी मूर्तियां मिल जाती हैं। कुछ मूर्तियों में दुर्गा की तरह अनेक सिर और कई-कई हाथ बने होते हैं। रूस के प्राचीन देवताओं और हिन्दू देवी-देवताओं के बीच बहुत ज्यादा समानता है।
---- प्राचीनकाल में रूस के मध्यभाग को जम्बूद्वीप का इलावर्त कहा जाता था। यहां देवता और दानव लोग रहते थे।
कुछ वर्ष पूर्व ही रूस में वोल्गा प्रांत के स्ताराया मायना (Staraya Maina) गांव में विष्णु की मूर्ति मिली थी जिसे 7-10वीं ईस्वी सन् का बताया गया। यह गांव 1700 साल पहले एक प्राचीन और विशाल शहर हुआ करता था।
            

 --- माना जाता है कि रूस में वाइकिंग या स्लाव लोगों के आने से पूर्व शायद वहां भारतीय होंगे या उन पर
भारतीयों ने राज किया होगा।
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------टाइटन्स( जिन्हें असुर कहा जाता था ) वे महान शिव भक्त थे रावण की भाँति... | जन कथाओं के अनुसार  ब्रोंज(कांसा)बनाने की शक्ति वाला देवता लेकर आया था जो देवी दनु के पुत्र थे | अर्थात कश्यप की पत्नी दनु( दक्ष पुत्री ) के पुत्र जो सारी आयरलेंड में राज्य करते थी एवं डेन्यूब नदी (दनु नदी )के किनारे किनारे सारे योरोप में ----दनु के पुत्र दानवसमस्त योरोप में डेन्यूब नदी के किनारे किनारे बसे | डेन्यूब नदी योरोप के विभिन्न देशों में दुनाज़,दूना,दुनेव,दुनारिया,आदि नामों से जानी जाती है | यह योरोप की सबसे बड़ी नदी है वोल्गा के बाद |

-----यह विष्णु की मूर्ति शायद वही मूर्ति है जिसे ललितादित्य ने स्त्री राज्य में बनवाया था। चूंकि स्त्री राज्य को उत्तर कुरु के दक्षिण में कहा गया है तो शायद स्ताराया मैना पहले स्त्री राज्य में हो।

----चित्र गूगल व निर्विकार -----
निर्विकार  पंकज श्याम -
 -------क्रमश --भाग चार --