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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

रविवार, 9 फ़रवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास ---भाग चार----वानर साम्राज्य , माया सभ्यता, दक्षिणी अमेरिका-चिली , पेरू, वियतनाम, इस्लामी देश ----डा श्याम गुप्त

....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----




भाग चार----वानर साम्राज्य , माया सभ्यता, दक्षिणी अमेरिका-चिली , पेरू, वियतनाम, इस्लामी देश --
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 १.बानर सामराज्य--होंडूरास --द.अमेरिका

२. नाजका रेखाए---पेरू ---शिव का त्रिशूल- Nazca Lines in. 
 ३.वियतनाम में शिवलिंग 

४.अफगान शासक की विष्णु पूजा  
                
  
५.अफगा निस्तान से शिव मूर्ति


६.ये हंसवाहिनी सरस्वती माँ की मूर्त्ति है जो अभी लंदन संग्रहालय में है.यह सऊदी अर्बस्थान से ही प्राप्त हुआ था

७.अष्टधातु से बना दिया ये दीप अरब से प्राप्त हुआ है जो इस्लाम-पूर्व है.इसी तरह का दीप काबा के अंदर भी अखण्ड दीप्तमान रहता है .


८.मक्का स्थित शिवलिंग ---

 ९. शिव लिंग का भाग –काला पत्थर जिसे चूमा जाता था              


---- १०.विक्रमादित्य के काल बने में काले ग्रेनाईट के अंतरिक्ष गिरे टुकडे का शिव लिंग ७००० बी सी जो    काबा  के शिव मंदिर का का मूल शिव लिंग था |


                                        ११.-----६००० वर्ष प्राचीन राम व हनुमान का चित्र ----ईराक 

८.वानर साम्राज्य का रहस्य : वानर का शाब्दिक अर्थ होता है 'वन में रहने वाला नर।' वन में ऐसे भी नर रहते थे जिनको पूछ निकली हुई थी।
------शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से 12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का नाम कपि था। हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था....कापी –विशालकाय वानरों की प्रजाति ..
-----यह मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है।
--भारत के बाहर वानर साम्राज्य --- सेंट्रल अमेरिका के मोस्कुइटीए (Mosquitia) में शोधकर्ता चार्ल्स लिन्द्बेर्ग ने एक ऐसी जगह की खोज की है जिसका नाम उन्होंने ला स्यूदाद ब्लैंका (La Ciudad Blanca) दिया है जिसका स्पेनिश में मतलब व्हाइट सिटी (The White City) होता है, जहां के स्थानीय लोग बंदरों की मूर्तियों की पूजा करते हैं। कि यह वही खो चुकी जगह है जहां कभी हनुमान का साम्राज्य हुआ करता था।
------एक अमेरिकन एडवेंचरर ने लिम्बर्ग की खोज के आधार पर गुम हो चुके Lost City Of Monkey God’ की तलाश की
 
                          चित्र१.     बानर सामराज्य--होंडूरास --द.अमेरिका ..
----अमेरिका की प्राचीन माया सभ्यता ---ग्वाटेमाला, मैक्सिको, पेरू, होंडुरास तथा यूकाटन प्रायद्वीप में स्थापित थी। यह एक कृषि पर आधारित सभ्यता थी। 250 ईस्वी से 900 ईस्वी के बीच माया सभ्यता अपने चरम पर थी। इस सभ्यता में खगोल शास्त्र, गणित और कालचक्र को काफी महत्व दिया जाता था। मैक्सिको इस सभ्यता का गढ़ था। आज भी यहां इस सभ्यता के अनुयायी रहते हैं। यह मय दानव द्वारा बसाई हुई सभ्यता ही थी

-------अमेरिकन इतिहासकार मानते हैं‍ कि भारतीय आर्यों ने ही अमेरिका महाद्वीप पर सबसे पहले बस्तियां बनाई थीं। अमेरिका के रेड इंडियन वहां के आदि निवासी माने जाते हैं और हिन्दू संस्कृति वहां पर आज से हजारों साल पहले पहुंच गई थी। माना जाता है कि यह बसाहट महाभारतकाल में हुई थी।
९.चिली, पेरू और बोलीविया में हिन्दू धर्म : अमेरिकन महाद्वीप के बोलीविया (वर्तमान में पेरू और चिली) में हिन्दुओं ने प्राचीनकाल में अपनी बस्तियां बनाईं और कृषि का भी विकास किया। यहां के प्राचीन मंदिरों के द्वार पर विरोचन, सूर्य द्वार, चन्द्र द्वार, नाग आदि सब कुछ हिन्दू धर्म समान हैं।
दक्षिण अमेरिका ---Peru
   चित्र२.नाजका रेखाए---पेरू ---शिव का त्रिशूल Nazca Lines in. http://www.unmuseum.org/nazca.htm
----सुग्रीव, रामायण में अपनी सेना को सीताजी की खोज के लिए उस क्षेत्र की खोज के लिए कहता है जहां शिव का त्रिशूल पाया गया  है |

१०.वियतनाम : पुराना चम्पा था। चम्पा के लोग और चाम कहलाते थे और उनके राजा शैव थे। दूसरी शताब्दी में स्थापित चंपा भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। यहां के चम लोगों ने भारतीय धर्म, भाषा, सभ्यता ग्रहण की थी। 1825 में चंपा के महान हिन्दू राज्य का अंत हुआ।
------वर्तमान समय में चाम लोग वियतनाम और कम्बोडिया के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं। आरम्भ में चम्पा के लोग और राजा शैव थे लेकिन कुछ सौ साल पहले इस्लाम यहां फैलना शुरु हुआ। अब अधिक चाम लोग
मुसलमान हैं पर हिन्दू और बौद्ध चाम भी हैं।
==चित्र  ३.यतनाम में शिवलिंग

 ११.इस्लाम - हिन्दू धर्म का विरूपण ---आज जिसे काबाकहते है, वह वस्तुतः काव्य शुक्र’ (शुक्राचार्य) के सम्मान में निर्मित उनके आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है। अरबी भाषा में शुक्रका अर्थ बड़ाअर्थात जुम्मा इसी कारण किया गया और इसी सेजुम्मा’ (शुक्रवार) को मुसलमान पवित्र दिन मानते है।
---अरब   शिव व पार्वती स्थान का इलावर्त राज्य का –स्त्री राज्य था जो वृहस्पति पत्नी तारा व चन्द्र के पुत्र बुध पुत्र महाराज इल का राज्य था , इल से  इल इलाह --- अल्लाह ... |
                
चित्र-४  शासक की विष्णु पूजा                 चित्र ५. अफगानिस्तान से शिव मूर्ति

चित्र-६.------ये हंसवाहिनी सरस्वती माँ की मूर्त्ति है जो अभी लंदन संग्रहालय में है.यह सऊदी अर्बस्थान से ही प्राप्त हुआ था..  चित्र-७.अष्टधातु से बना दिया ये दीप अरब से प्राप्त हुआ है जो इस्लाम-पूर्व है.इसी तरह का दीप काबा के अंदर भी अखण्ड दीप्तमान रहता है .

 चित्र८.मक्का स्थित शिवलिंग ---              चित्र ९. शिव लिंग का भाग –काला पत्थर जिसे चूमा जाता था

चित्र-१०.---- विक्रमादित्य के काल बने में काले ग्रेनाईट के अंतरिक्ष गिरे टुकडे का शिव लिंग ७००० बी सी जो    काबा  के शिव मंदिर का का मूल शिव लिंग था |
                                                                  

 चित्र ११.-----६००० वर्ष प्राचीन राम व हनुमान का चित्र ----ईराक




-----क्रमश भाग पांच----- योरोप ...

 

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----डा श्याम गुप्त

                                  ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 
हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -----भाग तीन--अफ्रीका, चीन, यजीदी, रूस ----

१.--मिस्र में ६००० वर्ष पुराना शिवलिंग




२.अफ्रीका-६००० वर्ष –शिव लिंग
४.  --फराहो—मिस्र –नंदी की पूजा 
५. चीन में हिन्दू मंदिर के खंडहर

६.शिव पार्वती , चीनी बौने के साथ एवं चीनी ड्रेगन –बादामी, कर्नाटक भारत

७. हिन्दू मंदिर अज़र्बेजान            

८. माता का त्रिशूल ..अज़र्बेजान मंदिर
९. आयरलेंड में  तारा पर्वत पर ---शिवलिंग पूजा
१० स्वास्तिक –बुल्गारिया में 
११.  यह विष्णु मूर्ति पाई गई। वर्षों से उत्खनन कर रहे समूह के डॉ. कोजविनका कहना है कि मूर्ति के साथ ही अब तक किए गए उत्खनन में उन्हें प्राचीन सिक्केपदकअंगूठियां और शस्त्र भी मिले हैं।
 १२.देवताओं का किला ----तुर्कमेनिस्तान 
 १३.हरप्पा टाइप सील---रूस 


१४.मंगोलिया में , सिवा नखलिस्तान में नमक पीसती हुई लड़की ,चाकी से ---जो भारतीय विशेषता है







५.अफ्रीकी में हिन्दू -- साउथ अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि आज से 6 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीकी लोग भी हिंदू धर्म का पालन करते थे।
-------साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नामक एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव की 6 हजार वर्ष पुरानी शिवलिंग की मूर्ति मिली जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता हैरान हैं कि यह शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रहा।
                                   
                               


                   



६.चीन में हिन्दू : चीन के इतिहासकारों के अनुसार चीन के समुद्र से लगे औद्योगिक शहर च्वानजो में और उसके चारों ओर का क्षे‍त्र कभी हिन्दुओं का तीर्थस्थल था। वहां 1,000 वर्ष पूर्व के निर्मित हिन्दू मंदिरों के खंडहर पाए गए हैं। इसका सबूत चीन के समुद्री संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां हैं।
वर्तमान में चीन में कोई हिन्दू मंदिर तो नहीं है, लेकिन 1,000 वर्ष पहले सुंग राजवंश के दौरान दक्षिण चीन के फुच्यान प्रांत में इस तरह के मंदिर थे लेकिन अब सिर्फ खंडहर बचे हैं।

७.यजीदी हिन्दू है? यजीदी धर्म भी विश्व की प्राचीनतम धार्मिक परंपराओं में से एक है। इस कुछ इतिहासकार हिन्दू धर्म का ही एक समाज मानते हैं। यजीदियों की गणना के अनुसार अरब में यह परंपरा 6,763 वर्ष पुरानी है अर्थात ईसा के 4,748 वर्ष पूर्व यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों से पहले से यह परंपरा चली आ रही है। यजीदियों की कई मान्यताएं हिन्दू और ईसाइयत से भी मिलती-जुलती हैं। ईसाइयत के आरंभिक दिनों में मयूर पक्षी को अमरत्व का प्रतीक माना जाता था। बाद में इसे हटा दिया गया।
----हिन्दुओं की तरह ही यजीदियों में जल का महत्व है। धार्मिक परंपराओं में जल से अभिषेक किए जाने की परंपरा है। तिलक लगाते हैं और अपने मंदिर में दीपक जलाते हैं। हिन्दू देतता कार्तिकेय जैसे दिखाई देने वाले देवता की पूजा करते हैं। उनके मंदिर और हिन्दुओं के मंदिर समान नजर आते हैं। पुनर्जन्म को मानते हैं। यजीदी अपने ईश्‍वर की 5 समय प्रार्थना करते हैं। सूर्योदय व सूर्यास्त में सूर्य की ओर मुंह करके प्रार्थना की जाती है। स्वर्ग-नरक की मान्यता भी है। धार्मिक संस्कार कराने वाले विशेषज्ञों की परंपरा है। व्रत, मेले, उत्सव की परंपरा भी है। समाधियां व पूजागृह (मंदिर) भी हैं।



 ७.रूस में हिन्दू : एक हजार वर्ष पहले रूस ने ईसाई धर्म स्वीकार किया। इससे पहले यहां वैदिक पद्धति के आधार पर हिन्दू धर्म प्रचलित था।
-----रूस में आज भी पुरातत्ववेताओं को कभी-कभी खुदाई करते हुए प्राचीन रूसी देवी-देवताओं की लकड़ी या पत्थर की बनी मूर्तियां मिल जाती हैं। कुछ मूर्तियों में दुर्गा की तरह अनेक सिर और कई-कई हाथ बने होते हैं। रूस के प्राचीन देवताओं और हिन्दू देवी-देवताओं के बीच बहुत ज्यादा समानता है।
---- प्राचीनकाल में रूस के मध्यभाग को जम्बूद्वीप का इलावर्त कहा जाता था। यहां देवता और दानव लोग रहते थे।
कुछ वर्ष पूर्व ही रूस में वोल्गा प्रांत के स्ताराया मायना (Staraya Maina) गांव में विष्णु की मूर्ति मिली थी जिसे 7-10वीं ईस्वी सन् का बताया गया। यह गांव 1700 साल पहले एक प्राचीन और विशाल शहर हुआ करता था।
            

 --- माना जाता है कि रूस में वाइकिंग या स्लाव लोगों के आने से पूर्व शायद वहां भारतीय होंगे या उन पर
भारतीयों ने राज किया होगा।
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------टाइटन्स( जिन्हें असुर कहा जाता था ) वे महान शिव भक्त थे रावण की भाँति... | जन कथाओं के अनुसार  ब्रोंज(कांसा)बनाने की शक्ति वाला देवता लेकर आया था जो देवी दनु के पुत्र थे | अर्थात कश्यप की पत्नी दनु( दक्ष पुत्री ) के पुत्र जो सारी आयरलेंड में राज्य करते थी एवं डेन्यूब नदी (दनु नदी )के किनारे किनारे सारे योरोप में ----दनु के पुत्र दानवसमस्त योरोप में डेन्यूब नदी के किनारे किनारे बसे | डेन्यूब नदी योरोप के विभिन्न देशों में दुनाज़,दूना,दुनेव,दुनारिया,आदि नामों से जानी जाती है | यह योरोप की सबसे बड़ी नदी है वोल्गा के बाद |

-----यह विष्णु की मूर्ति शायद वही मूर्ति है जिसे ललितादित्य ने स्त्री राज्य में बनवाया था। चूंकि स्त्री राज्य को उत्तर कुरु के दक्षिण में कहा गया है तो शायद स्ताराया मैना पहले स्त्री राज्य में हो।

----चित्र गूगल व निर्विकार -----
निर्विकार  पंकज श्याम -
 -------क्रमश --भाग चार --

 

रविवार, 26 जनवरी 2020

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का सनातन हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास----भाग एक --

                            ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

हिन्दू इतिहास ----एक लाख वर्षों का सनातन हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास----- भाग एक ---
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अ.पृथ्वी की उत्पत्ति ---४ अरब वर्ष...वैदिक व विज्ञान दोनों ही मान्यताओं में -
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ब.मानव उत्पत्ति --- पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति---
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==१.-#विज्ञान के अनुसार —१लाख ४० हज़ार वर्ष पूर्व –अफ्रीका में ----२०००० वर्ष अफ्रीका से बाहर निकलने में लगे –
==२-#भारतीय शास्त्र के वैदिक साहित्य मतगणना अनुसार --- १लाख वर्ष पहले तो हिन्दू सनातन धर्म की स्थापना होचुकी थी ---धर्म ---सनातन धर्म – वैदिक संस्कृति---हिन्दू धर्म ---| मानव की उत्पत्ति तो भारत भूमि पर लाखों वर्ष पूर्व हुई थी |
\==#पाश्चात्य कथा -- छः युगों में, --संत आगस्टाइन मत –(सभी पाश्चात्य धर्मों में मानव-कथा महाजलप्रलय से प्रारंभ होती है )--
--प्रथम युग –मानव का अवतरण , प्रथम मानव –आदम या एडम्स से ..नोआ जलप्रलय तक ( ब्रह्म, ॐ असतो मा सद गमय .का ज्ञान व कथा यहाँ नहीं है )
--द्वितीय युग ---अब्राहम –सारे विश्व का पिता  ब्रह्मा चतुर्मुख ---स्वय्न्भाव मनु, कश्यप , सप्तर्षि, शिव आदि पाश्चात्य वर्णन में नहीं हैं )
--तृतीय युग –अब्राहम से किंग डेविड तक ..( = राजा प्रथु )
--चतुर्थ युग –डेविड ---प्रभु की जनता का स्वर्ग से बेबीलोनिया में बसना (=राजा पृथु एवं मानव वंश का पृथ्वी पर बसना व फैलना)
--पंचम युग --- उस युग से जीसस क्राइस्ट का जन्म ..(=विभिन्न अवतारों के क्रिया कलाप, द्वापर-कृष्ण तक )
--छटवां युग –जीसस से अब तक –( = नवीन युग-कलियुग - कल्कि अवतार –भविष्य का
\
==#भारतीय कथा – (वेदों , उपनिषद, महाभारत, रामायण आदि शास्त्रों के अनुसार )---
सनातन हिन्दू धर्म के १ लाख से भी ज्यादा वर्षों के लिखित इतिहास में लगभग ===20 हजार वर्ष पूर्व नए सिरे से वैदिक धर्म की स्थापना ===हुई और नए सिरे से सभ्यता का विकास हुआ। ( स्वय्न्भाव मनु का काल ---प्रथम सृष्टि _वैवस्वत मनु के काल में द्वितीय सृष्टि ) विकास के इस प्रारंभिक क्रम में हिमयुग की समाप्ति के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला।
-----सनातन हिन्दू धर्म में ---प्रारम्भ— ब्रह्माण्ड व पृथ्वी की उत्पत्ति से होता है --शून्य युग,असद ब्रह्म , आदिनाद =ओम , स्वयंभू परब्रह्म से –पर ब्रह्म –अपरा माया ,प्रकृति --आदि-ब्रह्मा---आदि शिव ,महाविष्णु , ब्रह्मा के पुत्र - शिव (=एडम या आदम= प्रथम सभ्यता ----स्वय्न्भाव मनु..जलप्लावन –द्वितीय सभ्यता -वैवस्वत मनु = नोआ, नूह ..
-----वेद और अन्य शास्त्र , पुराण, रामायण , महाभारत पढ़ने पर हमें पता चलता है कि



१.विश्व की प्रथम मानव सभ्यता – देव-असुर सभ्यता --
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-----आदिकाल में प्रमुख रूप से ये जातियां थीं- देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, भल्ल, वसु, अप्सराएं, रुद्र, मरुदगण, किन्नर, नाग आदि।
-----प्रारंभ में ब्रह्मा और उनके पुत्रों ने धरती पर विज्ञान, धर्म, संस्कृति और सभ्यता का विस्तार किया। इस दौर में शिव और विष्णु सत्ता, धर्म और इतिहास के केंद्र में होते थे।
------यह #प्रथमसृष्टि थी ---स्वयांभाव मनु -- समस्त धरती पर इन का राज्य था |---देवता और असुरों का काल अनुमानित 20 हजार ईसा पूर्व से लगभग 7 हजार ईसा पूर्व तक चला। ----
\
२.#वैदिक सभ्यता -----फिर धरती के जल में डूब जाने के बाद-----(#महाजलप्लावन---मत्स्य अवतार---#द्वितीयसृष्टि ) -----ययाति और वैवस्वत मनु के काल और कुल की शुरुआत हुई। भारत में मनु की नौका के उतरने पर ----भारत भर में मानव फैला जहां से दुनिया भर में मानव का मार्ग प्रशस्त करता रहा | यही मानव विभिन्न सभ्यताएं स्थापित करता रहा |
-----दुनियाभर की प्राचीन सभ्यताओं से सनातन वैदिक हिन्दू धर्म का सम्बन्ध था। संपूर्ण धरती पर हिन्दू वैदिक धर्म ने ही लोगों को सभ्य बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक विचारधारा की नए-नए रूप में स्थापना की थी।
----आज दुनियाभर की धार्मिक संस्कृति और समाज में हिन्दू धर्म की झलक देखी जा सकती है चाहे वह यहूदी, यजीदी, रोमा, पारसी, बौद्ध धर्म हो या ईसाई-इस्लाम धर्म हो।
\
------भातीय लोगों ने इस दौर में विश्‍वभर में विशालकाय मंदिर, भवन और नगरों का निर्माण कार्य किया किया था। हिन्दू धर्म ने अपनी जड़ें यूरोप से लेकर एशिया तक फैला रखी थी, जिसके प्रमाण आज भी मिलते हैं।
-------धर्म चाहे कोई भी हो उसका उद्भव सनातन धर्म यानि की हिन्दू धर्म में से ही हुआ है।
-------क्रमश ------अगली पोस्टों में --आगे विश्व की ऐसी ही जगहों का सचित्र वर्णन है जहां कभी हिन्दू धर्म अपने चरम पर हुआ करता था।----सभी चित्र --गूगल एवं निर्विकार 

 

ध्रुवीकरण के पथ पर,,,भारत ---- डा श्याम गुप्त

                                     ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

ध्रुवीकरण के पथ पर.....
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महाजलप्लावन में देव-असुर-मानव सभ्यता के विनाश पर जब वैवस्वत मनु के नेतृत्व में नवीन मानव सभ्यता का निर्माण हुआ एवं मानव भारत भूमि पर उतरा और महाराजा ययाति के वंश रूप में समस्त विश्व में विस्तरित हुआ, उन्नति के सोपानों पर बढ़ता हुआ विभिन्न समुदायों में बंटकर स्थापित होने लगा |

-------- कालान्तर में वृहत्तर भारत में चार प्रारम्भिक समुदाय बने यवन,आर्य,किरात,द्रविड़ | पश्चिम में यवन, उत्तर में आर्य, पूर्व में किरात एवं दक्षिण में द्रविड़|

-----इन चारों समुदायों ने आपसी भिन्नताओं, वैमनष्यों, राजनैतिक शत्रुताओं एवं सांस्कृतिक विरोधाभासों को झेलते-लांघते हुए पारस्परिक आदान-प्रदान के आधार पर एक भारत का निर्माण किया| और एक अखंड भारत देश हमारे सम्मुख विश्वरूप बनकर स्थापित हुआ |
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फिर हुआ आक्रमणों का दौर का आरम्भ | अखंड भारत पर सबसे पहला हमला यूनानियों ने किया, फिर हूणों ने फिर मुस्लिमों ने फिर ईसाइयों ने|


-----सभी हमलों को क्रमश पीछे धकेल दिया गया| यूनानियों हूणों आदि को महान भारतीय सनातन संस्कृति ने निगल लिया विलीन कर लिया अब कहाँ हैं वे|


-------मुस्लिम एवं ईसाई हमलों के अवशेष एवं उनके धर्मान्तरित समाज अभी भी चुनौती बन कर भारत एवं सनातन हिन्दू धर्म के सम्मुख उपस्थित हैं जो और अधिक खतरनाक ढंग से सामने आने वाले हैं |
\
इतिहास अपने को दोहराने वाला है| इन सभी अवशिष्ट धार्मिक समाजों एवं धर्मान्तरित समाजों का अपने मूल धर्म हिन्दू धर्म में अंतरण होने वाला है, जो हर युग में होता है | वैसे ही जैसे यूनानी व हूण आदि समाजों का हुआ| वे आज कहाँ हैं कब विलुप्त होगयीं किसी को पता भी नहीं चला, उनके अवशेष भी कहाँ हैं, वे सब हिन्दू सभ्यता के अंग बन चुके|
\
भारत जैसी सभ्यता जो सनातन काल से है और निरंतरता का प्रतीक है वह अपनी आतंरिक शक्ति से अपने हमलावरों को भी अवशोषित कर लेती है स्वयं में आत्मसात करके|


-------इसीलिये इसे सनातन देश व सनातन धर्म कहा जाता है कि यह सब कुछ झेलते हुए आत्मसात की प्रक्रिया में अपने सनातन हिन्दू स्वरुप को और सुदृढ़ करता हुआ अविनाशी सनातन बना रहता है |


------ आज नहीं तो कल यही परिणाम मुस्लिमों व ईसाई समाज का होने वाला है|
\
दीपक की लौ अंतिम समय में तीब्र होने लगती है|



 

सोमवार, 13 जनवरी 2020

हिन्दू इतिहास--एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास -- भाग दो---------डा श्याम गुप्त

                               ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

हिन्दू इतिहास  ----एक लाख वर्षों का हिन्दू धर्म का संक्षिप्त इतिहास ----  क्रमश  ----भाग दो----सरस्वती घाटी, हरप्पा, इंडोनेशिया, बाली, बेटिकन सिटी ------












1.सिन्धु-सरस्वती घाटी की हड़प्पा एवं मोहनजोदोड़ो सभ्यता (5000-3500 ईसा पूर्व) : हिमालय से निकलकर सिन्धु नदी अरब के समुद्र में गिर जाती है। प्राचीनकाल में इस नदी के आसपास फैली सभ्यता को ही सिन्धु घाटी की सभ्यता कहते हैं। इस नदी के किनारे के दो स्थानों हड़प्पा और मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान) में की गई खुदाई में सबसे प्राचीन और पूरी तरह विकसित नगर और सभ्यता के अवशेष मिले। इसके बाद चन्हूदड़ों, लोथल, रोपड़, कालीबंगा (राजस्थान), सूरकोटदा, आलमगीरपुर (मेरठ), बणावली (हरियाणा), धौलावीरा (गुजरात), अलीमुराद (सिंध प्रांत), कच्छ (गुजरात), रंगपुर (गुजरात), मकरान तट (बलूचिस्तान), गुमला (अफगान-पाक सीमा) आदि जगहों पर खुदाई करके प्राचीनकालीन कई अवशेष इकट्ठे
किए गए। अब इसे सैंधव अथवा सरस्वती सभ्यता कहा जाता है।
शिव लिंग ---हरप्पा











हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में मातृदेवी या प्रकृति देवी  आदि देवियों की असंख्य मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। प्राचीनकाल से ही मातृ या प्रकृति की पूजा भारतीय करते रहे हैं और आधुनिक काल में भी कर रहे हैं। इससे ज्ञात होता है कि हिन्दू धर्म मानव के  प्राचीनतम काल   से है | सिन्धु घाटी की सभ्यता को दुनिया की सबसे रहस्यमयी सभ्यता माना जाता है|  इसके पतन के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
---हड़प्पा से कई ऐसी ही चीजें मिली हैं, जिन्हें हिन्दू धर्म से जोड़ा जा सकता है। पुरोहित की एक मूर्ति, बैल, नंदी, मातृदेवी, बैलगाड़ी और शिवलिंग जो लगभग 5000 पुराना है। शिवजी को पशुपतिनाथ भी 



 पशुपतिनाथ की योगस्थ मुद्रा की सील भी प्राप्त हुई हैं | 



















२.बाली का प्राचीन मंदिर   और लंका  : इंडोनेशिया कभी हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था, लेकिन इस्लामिक उत्थान के बाद यह राष्ट्र आज मुस्लिम राष्ट्र है। जहां आज इंडोनेशियन इस्लामिक यूनिवर्सिटी है वहां कभी हिन्दू मंदिर हुआ करता था, जिसमें शिव और गणेश की पूजा की जाती थी। यहां से एक ऐतिहासिक शिवलिंग भी मिला है।
बाली द्वीप पर हिन्दुओं के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां एक गुफा मंदिर भी है। इस गुफा मंदिर को गोवा गजह गुफा और एलीफेंटा की गुफा कहा जाता है। इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया गया। यहां 3 शिवलिंग बने हैं।
--- आज के युग अनुसार रावण का राज्य विस्तार, इंडोनेशिया, मलेशिया, बर्मा, दक्षिण भारत के कुछ राज्य और संपूर्ण श्रीलंका पर रावण का राज था।

इंडोनेशिया में नंदी की मूर्ति
सागर मंथन का दृश्य –थाईलेंड
                                                                                                                                                                                                                ३.वेटिकन शहर का शिवलिंग : वेटिकन  वाटिका का बिगड़ा रूप है। वैदिक काल में यह स्थान भी हिन्दू धर्म का केंद्र था। यहां पुरातात्विक खुदाई के दौरान शिवलिंग प्राप्त हुआ है जो रोम के ग्रेगोरियन इट्रस्केन
संग्रहालय (Gregorian Etruscan Museum) में रखा गया है।
                     =वेटिकन सिटी में शिवलिंग

-----ईसाई धर्म यानि क्रिश्चैनिटीको भी सनातन धर्म की कृष्ण नीतिऔर अब्राहम को ब्रह्मासे ही लिया गया है। पी.एन.ओक का कहना है कि इस्लाम और ईसाई, दोनों ही धर्म वैदिक मान्यताओं के विरुपण से जन्में हैं।
-----बेबीलोन की प्राचीन गुफाओं में पुरातात्त्विक खोज में जो भित्ति चित्र मिले है, उनमें विष्णु को हिरण्यकशिपु के भाई हिरण्याक्ष से युद्ध करते हुए उत्कीर्ण किया गया है।

४.कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य : विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक कंबोडिया में स्थित है। यह कंबोडिया के अंकोर में है जिसका पुराना नाम 'यशोधरपुर' था। इसका निर्माण सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय (1112-53ई.) के शासनकाल में हुआ था। यह विष्णु मन्दिर है जबकि इसके पूर्ववर्ती शासकों ने प्रायः शिवमंदिरों का निर्माण किया था। कंबोडिया में बड़ी संख्या में हिन्दू और बौद्ध मंदिर हैं | पौराणिक काल का कंबोजदेश कल का कंपूचिया और आज का कंबोडिया। अंगकोर वाट की बात ही निराली है। ये दुनिया का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर है।


-----क्रमश --भाग तीन