पिछली पोस्ट भाग - ५ में
जीव,जीवन,बृद्धि, लिंग चयन व स्वचालित मैथुन प्रक्रिया कैसे प्रारम्भ हुई इस पर आधुनिक विज्ञान का मत व्याख्यायित किया था। इस अंक में
वैदिक विज्ञान का मत प्रस्तुत किया जारहा है|
ब्रह्मा ने समस्त प्राणियों ,देव,असुर,वनस्पति के साथ ही मानव का निर्माण किया ,यह सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ कृति थी जिसे सभी पुरुषार्थ ,धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष ) के योग्य पाया गया |यह क्रम इस प्रकार था-
----अ.मानस सृष्टि
----बी.संकल्प सृष्टि
----स.काम संकल्प सृष्टि
----द .मैथुनी (माहेश्वरी )प्रजा
१. सर्वप्रथम ब्रह्मा ने -सनक,सनंदन ,सनातन व सनत्कुमार --
चार मानस पुत्र बनाए ,जो योग साधना हेतु रम
गए।
२- पुनःसंकल्प से नारद,भृगु,कर्म,प्रचेतस,पुलह,अन्गिरिसि,क्रतु,पुलस्त्य,अत्री,मरीचि --
१० प्रजापति बनाए३.-पुनः
संकल्प द्वारा ९ पुत्र- भृगु ,मरीचि,पुलस्त्य,
angira ,क्रतु,अत्रि,vashishth ,
daksh ,पुलह
एवं ९पुत्रियाँ --ख्याति,भूति ,सम्भूति,प्रीति,क्षमा प्रसूति आदि उत्पन्न कीं |
यद्यपि ये सब संकल्प द्वारा संतति प्रवृत्त थे परन्तु
कोई निश्चित ,सतत ,स्वचालित प्रक्रिया व क्रम नहीं था ( सब एकान्गी थे--प्राणियों व वनस्पतियों में भी ), अतः ब्रह्मा का सृष्टि क्रम व कार्य समाप्त नही हो
paa rahaa था |
३-ब्रह्मा ने पुनः
prabhu का स्मरण
किया, तब
अर्ध नारीश्वर( द्विलिन्गी)
रूप ,में रुद्र देव जो शम्भु महेश्वर व माया का सम्मिलित रूप था,प्रकट हुए। जिसने स्वयम को --क्रूर-सौम्या; शान्त-अशान्त;श्यामा-गौरी;शीला-अशीला आदि
११ नारी भाव एवम ११ पुरुष भावों में विभक्त किया।रुद्रदेव के ये सभी ११-११ स्त्री-पुरुश भाव सभी जीवों में समाहित हुए,इस प्रकार
काम श्रिष्टि का प्रादुर्भाव हुआ।
४- ब्रह्मा ने स्वयम के दायें-बायें भाग से
मनु व शतरूपा को प्रकट किया,जिनमे रुद्रदेव के ११-११ नर नारी भाव समाहित होने से वे
प्रथम मानव युगल हुए। वे मानस,सन्कल्प व काम सन्कल्प विधियों से सन्तति उत्पत्ति में प्रव्रत्त थे ,परन्तु
अभी भी पूर्ण स्वचालित प्रक्रिया नहीं थी।
५- पुनः ब्रह्मा ने मनु की काम सन्कल्प पुत्रियांआकूति व प्रसूति-को दक्ष को दिया।दक्ष को मानस श्रिष्टि फ़लित नहीं थी अतः उस
ने काम-सम्भोग प्रक्रिया से ५००० व १०००० पुत्र उत्पन्न किये ,परन्तु सब नारद के उपदेश से तपश्या को चले गये ।दक्ष ने नारद को सदा घूमते रहने का श्राप देदिया।
६।-पुनः
दक्ष नेप्रसूति के गर्भ से -सम्भोग ,मैथुन जन्य प्रक्रिया से
६० पुत्रिओं को जन्म दिया,जिन्हें सोम,अन्गिरा,धर्म,कश्यप व अरिष्ट्नमि आदि रिशियों को दिया गया ,
जिनसे मैथुनी क्रिया द्वारा,सन्तति से आगे स्वतः क्रमिक श्रष्टि क्रम चला,व चलरहा है। अतः दक्ष से वास्तविक श्रष्टि क्रम माना जाता है।
-- प्रथम मैथुनी क्रम प्रसूति से चला अतः गर्भाधान को
प्रसूति एवन जन्म को
प्रसव कहा जाता है।
- - शम्भु महेश्वर, इस लिन्गीय चयन व निर्धारण व काम-सम्भोग स्वतः उत्पत्ति प्रणाली के मूल हैं अतः इस श्रष्टि को "
माहेश्वरी प्रज़ा या श्रष्टि " कहाजाता है।
भला जबतक नारी भाव की उत्पत्ति न होती स्वतः श्रष्टि क्रम कैसे पूरा हो सकता था?? इस प्रकार ब्रह्मा का स्रष्टि क्रम सम्पूर्ण हुआ।